
जावीद अहमद को लेकर कुछ उम्मीदें पाल रही जनता
लखनऊ,6 फरवरी। गरीब को सताती पुलिस, एफआईआर दर्ज करने में आना कानी करती पुलिस और फिर गश्त के नाम से भागती पुलिस, नेताओं की जी हाॅ हजूरी करती पुलिस ही उत्तर प्रदेश पुलिस की पहचान बन चुकी है। लेकिन नए पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद ने कुछ कागजी घोड़े ऐसे दौड़ाए है जिससे जनता का यह उम्मीद हुई है कि शायद यूपी पुलिस का चेहरा कुछ ठीक नजर आए। हालाकि इस बात की उम्म्मीद कम है क्योकि सरकार तक पहुंचे रखने वाले पुलिस कर्मियों की संख्या यूपी पुलिस में बहुत है।
यूपी पुलिस की नकारात्मक छवि को बदलने के लिए डीजीपी एस.जावीद अहमद ने नई पहल की है। पुलिसकर्मियों के अच्छे कार्यो के प्रचार-प्रसार और उनका सम्मान करने पर फोकस कर रहे है। महानिदेशक ने सभी एसपी-एसएसपी को आदेश दिये है कि सभी जिलों में सराहनीय एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मी सम्मानित किये जाएं। डीजीपी ने सभी जोनल आईजी, रेंज डीआइजी और जिलों के एसपी-एसएसपी को पत्र भेजकर यह हिदायत दी है। डीजीपी ने कहा है कि सभी जिलों में हर माह एक समारोह आयोजित कर पांच से आठ पुलिसकर्मियों को उनके उत्कृष्ट और प्रशंसनीय कार्यो के लिए सम्मानित किया जाए। इसी तरह तीन माह में जोनल स्तर पर आठ से दस पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया जाए। डीजीपी ने इस सकारात्मक पहल के जरिए पुलिस की अच्छी छवि प्रस्तुत करने की योजना बनायी है।
इससे पुलिसकर्मियों को अपने अच्छे कार्यो का रिस्पांस मिलेगा और समाज में उनकी शोहरत भी बढ़ेगी। निश्चित तौर पर दूसरे पुलिसकर्मी भी इससे सबक लेंगे। डीजीपी का पुलिस अफसरों से कहना हैै कि जिस पीडि़त व्यक्ति को पुलिसकर्मियों द्वारा राहत पहुंचायी गयी या जिन लोगों की मदद की गयी है, उन्हें समारोह में आमंत्रित किया जाए। पुलिस के प्रति उनके अनुभवों को उन्हीं की जुबानी सुनाया जाए। अगर आने में असमर्थ हों तो उसकी वीडियो रिकार्डिग करायी जाए और उसके अच्छे प्रभाव को दिखाया जाए।
पुलिस के अधिकारी और कर्मचारियों के सराहनीय और उत्कृष्ट कार्यो के प्रचार प्रसार के लिए डीजीपी ने मीडिया से बेहतर रिश्ता बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिले के गणमान्य व्यक्तियों, बुद्धिजीवियों और अन्य क्षेत्रों के सक्रिय प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयासों से पुलिस की छवि उज्जवल होगी और सभी लोग सकारात्मक दिशा में कदम बढ़ा सकेंगे। इसके बावजूद लोकतंत्र पर बुरी तरह से हाबी हो चुकी राजनीति के चलते शायद जावीद अहमद सफल न हो सके।
https://rashtriyadinmaan.com
