जरूरी मुद्दों पर मौन रहते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी : मनमोहन


Manmohan Singh

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि केंद्र की राजग सरकार में आत्मविश्वास का संकट है। एक पत्रिका को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सभी देशवासियों को आश्वस्त करना चाहिए कि उन्हें हमारी भलाई का ध्यान है।

मनमोहन ने कहा कि लोगों का सरकार पर भरोसा नहीं है। लोग (उद्योगपति) जब मंत्रियों के पास जाते हैं, तो वे सही बातें करते हैं। लेकिन जब वे वापस आते हैं, तो कहते हैं कि ज्यादा कुछ नहीं बदला है। इससे साफ है कि सरकार में आत्मविश्वास का संकट है।

मनमोहन ने गोमांस विवाद और बिसहड़ा कांड को लेकर मोदी की चुप्पी पर भी निशाना साधा। विभिन्न मसलों पर चुप्पी साधे रहने के लिए खुद निशाना बनने वाले मनमोहन ने कहा कि हमारे देश में प्रधानमंत्री से नेतृत्व की उम्मीद की जाती है। लेकिन मोदी ने कभी कुछ नहीं कहा। वह चाहे गोमांस का विवाद हो या मुजफ्फरनगर का मामला या कोई और घटना। वे हमेशा चुप रहे।

हालांकि, सरकार की आलोचना के बावजूद सिंह ने कहा कि मोदी के लिए यह एक बड़ा मौका है। उन्होंने कहा कि सार्थक सरकार और बुद्धिमान नेतृत्व के सामने बेहिसाब संभावनाएं होती हैं। वह अर्थव्यवस्था का बेहतर प्रबंधन कर सकता है। वह सामाजिक तनाव को काबू में रख सकता है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने यह तो माना कि मोदी सरकार में बड़ी शक्तियों के साथ संबंध बेहतर हुए हैं, लेकिन पाकिस्तान और नेपाल के प्रति नीति को उन्होंने असंगत बताया। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों के प्रति सरकार की नीति एक कदम आगे और दो कदम पीछे की हो गई है। प्रधानमंत्री की अचानक लाहौर यात्रा का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि इस मामले में इतना उत्साहित होने की कोई जरूरत नहीं थी।

संप्रग सरकार का 10 वर्षों तक नेतृत्व करने वाले मनमोहन ने एक घटना को याद करते हुए कहा कि शरद पवार के 75वें जन्मदिन के मौके पर उनकी पीएम से बात हुई थी। उस समय मोदी ने उनसे कहा था कि सरकार उनके सुझावों पर चलती है। फिर मनमोहन ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि वे सार्वजनिक रूप से यह बात कह सकते हैं।


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