मुंबई: देश में विनिर्माण क्षेत्र को गति देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई के वर्ली स्थित नेशनल स्पोटर्स क्लब ऑफ इंडिया में मेक इन इंडिया वीक का उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम ने कहा कि ‘भारत की 65 फीसदी आबादी 35 वर्ष से नीचे (युवा) हैं। हम भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाना चाहते हैं। हम हमारे सकल घरेलू उत्पाद का 25 प्रतिशत विनिर्माण चाहते हैं। यह कार्यक्रम हमारे विकास को दर्शाता है।’
आज भारत संभवत: एफडीआई के लिए सबसे खुला देश : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ‘साल भर में मेक इन इंडिया भारत में अब तक का सबसे बड़ा प्लान बन गया है। आज भारत संभवत: एफडीआई के लिए सबसे खुला देश है। यह एक समय में है जब वैश्विक एफडीआई में गिरावट आई है। मैं रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स को लागू नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है।’
भारत में निवेश के लिए यह सबसे अच्छा समय है : प्रधानमंत्री
पीएम ने विश्वसनीय व स्थिर कर प्रणाली का वादा करते हुए कहा कि भारत में निवेश के लिए यह सबसे अच्छा समय है क्योंकि सरकार कंपनी कानून न्यायाधिकरण की स्थापना व प्रभावी आईपीआर प्रणाली सहित अनेक सुधार कर रही है। पीएम ने कहा कि ‘हमने कराधान के मोर्चे पर अनेक सुधार किए हैं। हम कह चुके हैं कि पिछली तारीख से कर लगाने की व्यवस्था बहाल नहीं की जाएगी और मैं इस प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराता हूं। हम अपनी कर प्रणाली को पारदर्शी, स्थिर व विश्वसनीय बनाने के लिए भी तेजी से काम कर रहे हैं।’ उन्होंने अपने संबोधन में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहलों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लाइसेंस, सुरक्षा व पर्यावरण से जुड़ी मंजूरियों के संबंध में प्रावधानों को युक्तिसंगत तथा प्रकिया को सरल बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं।
‘इस सदी को अपनी सदी बनाना चाहते हैं तो भारत को अपना केन्द्र बनाएं‘
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं कहता रहा हूं कि यह सदी एशिया की सदी है। मेरी आपको सलाह है कि यदि आप इस सदी को अपनी सदी बनाना चाहते हैं तो भारत को अपना केन्द्र बनाएं।’ इसके साथ ही उन्होंने निवेशकों से भारत की विकास गाथा में शामिल होने न्योता दिया। उन्होंने कहा, ‘जो यहां उपस्थित हैं और वह भी जो यहां नहीं भी हैं उन्हें मैं उन्हें भारत की वृद्धि में भागीदार बनने के लिये आमंत्रित करता हूं।’
इस कार्यक्रम में स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन और फिनलैंड के प्रधानमंत्री जुहा सिपिला भी मौजूद रहे। साथ ही 49 देशों से सरकारी प्रतिनिधि और 68 देशों के व्यापारिक प्रतिनिधि भी इस प्रोग्राम में शामिल हुए।
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