सख्त हुई मोदी सरकार, अब लदेंगे ऐश के दिन!


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नई दिल्ली: कश्मीर में हिंसा के बाद अब सरकार अलगाववादियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने जा रही है. अब आम जनता के पैसों पर अलगाववादियों की ऐश खत्म हो सकती है. आज कश्मीर के दौरे से लौटे सभी दलों के नेताओं की गृहमंत्री के साथ बैठक हुई जिसमें कश्मीर के अलगाववादियों से हिंसा छोड़कर बातचीत के लिए आगे आने की अपील की गई . सरकार ने दोहराया है कि देश हित से समझौता नहीं किया जाएगा.

कश्मीर को कैसे शांत किया जाए और अलगाववादी नेताओं पर कैसे लगाई जाए लगाम? इसी एजेंडे पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई सभी दलों बैठक में जम्मू-कश्मीर के हालात पर चिंता जताने के साथ ही कई सहमतियां बनी हैं. सरकार ने संकेत दिये हैं कि अब आतंकियों और अलगाववादियों में कोई फर्क नहीं किया जाएगा . इसके लिए सबसे पहले अलगाववादी नेताओं को मिली सुरक्षा हटाई जाएगी.

अलगाववादियों की ऐश अब खत्म हो सकती है जिसपर सरकार का सालाना करीब 100 करोड़ रुपया खर्च होता है. इनकी सुरक्षा में 950 पुलिसकर्मी तैनात हैं और सुरक्षा में लगे ये पुलिसकर्मी हटाए जाएंगे. हवाई यात्रा, होटल और गाड़ी की सुविधा पर रोक लग सकती है. अलगाववादियों की विदेशी फंडिंग भी बंद होगी.

केंद्र ने राज्य सरकार को भी ऐसा ही करने की सलाह दी है . इससे पहले कश्मीर से लौटे नेताओं ने राज्य सरकार पर हालात संभालने में नाकामी का आरोप लगाया था . वहीं सरकार ने कहा है कि देश हित से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा .

दरअसल, अलगाववादियों के मुख्य तौर पर दो गुट हैं. उदारवादी गुट अलग कश्मीर चाहता है. कट्टरपंथी गुट पाकिस्तान के साथ जाना चाहता है. दोनों गुट मिलकर कश्मीर के हालात बिगाड़ रहे हैं.
उदारवादी गुट के मीरवाइज को जेड श्रेणी की सुरक्षा, मौलाना अब्बास अंसारी की सुरक्षा में 4 पुलिसवाले हैं. अब्दुल गनी बट्ट, बिलाल लोन को 4-4 पुलिसकर्मी मिले हैं. जफर अहमद बट्ट की सुरक्षा में 2 पुलिसकर्मी तैनात हैं. कट्टरवादी गुट के ज्यादातर नेताओं को सुरक्षाकर्मी नहीं मिले हैं.

कश्मीर में दो महीने पहले आतंकी बुरहान वानी की मौत से हिंसक विरोध प्रदर्शन और कर्फ्यू जारी है जिससे पूरे कश्मीर का जनजीवन अस्त व्यस्त है .


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