
कुछ दिनों पहले तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने के मुहाने पर खड़ी AIADMK महासचिव शशिकला जेल पहुँच गयी हैं। बेंगलुरू सेंट्रल जेल में उनकी नई पहचान कैदी नंबर 9435 है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहाँ पर उनको मोमबत्ती और अगरबत्ती बनाने का काम दिया गया है। आय के अधिक सम्पत्ति मामले में उन्हें चार साल की सज़ा सुनाई गयी है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के दो दशक पुराने मामले में उनकी सजा बहाल कर दी थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जेल में शशिकला की पहली रात एक आम क़ैदी की तरह ही गुज़री। उन्होंने जमीन पर सोकर रात गुज़ारी। उन्हें खाने में दो रोटी, चावल और सांभर दिया गया। शशिकला को बैरक नंबर 2 में रखा गया है। उनके साथ दो अन्य महिला कैदी भी रहेंगी।
शशिकला ने स्पेशल कोर्ट के जज अश्वतनारायण के समक्ष आत्मसमर्पण किया। चेन्नई से सड़क मार्ग से यहां पहुंची शशिकला को कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर होसुर से 28 किलोमीटर दूर पराप्पना अग्रहारा स्थित केन्द्रीय कारागार भेज दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने आत्मसमर्पण करने के लिए और दो सप्ताह की मोहलत देने और घर का खाना उपलब्ध कराने का उनका अनुरोध भी ठुकरा दिया। शशिकला के रिश्तेदार वीएन सुधाकरन और एलावारसी ने भी आत्मसमर्पण कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों की सजा भी बहाल कर दी थी।
शशिकला उसी कार में आईं जिस कार का इस्तेमाल जयललिता किया करती थीं। उन्हें सख्त सुरक्षा के बीच बुधवार शाम कारागार ले जाया गया। वह तीन साल और करीब 11 महीने जेल में रहेंगी। निचली अदालत ने उन्हें चार साल की सजा सुनाई थी। इससे पहले सितंबर, 2014 में निचली अदालत ने दोषी ठहराया था जिसके बाद वो 21 दिन की सजा परप्पना अग्रहरा जेल में काट चुकी हैं।
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