
लखनऊ,। जी हाॅ कोई माने या न माने लेकिन इतना तो तय है कि उच्च स्तर पर प्रशासनिक अफसरों के तबादलों को लेकर मुख्यमंत्री बेहद सर्तक एवं सजग है तभी तो पखवारा बीत जाने के बाद भी वो फेरबदल मुख्यमंत्री ने नही किया जो अन्य मुख्यमंत्री करते थे। लेकिन सेतु निगम प्रबंधन लगभग मुख्यमंत्री की इस मंशा से अनभिज्ञ है यही कारण है कि उसने आनन फानन में द्वितीय शानिवार और रविवार को ही थोक भाव में उप परियोजना प्रबंधकों के तबादले कर दिये। यही उप परियोजना प्रबंधकों को उनकी मंशानुसार उनके गृह जनपद एवं स्थानान्तरित तबादले को रोककर दूसरे दिन उसे दोहरा चार्ज भी दे दिया गया। इस प्रकार के तबादले में सेतु निगम इंजीनियर्स संवर्ग में रोश है,इस मामले में मुख्यमंत्री स्तर पर शिकायत की भी खबर है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार द्वितीय शनिवार यानि सात अप्रैल को उपरियोजना प्रबंधक शशि भूषण वाष्र्णेय को महाप्रबंधक सम्बद्ध पद से हटाकर ग्रेटर नोयडा गाजियाबाद भेज दिया गया। इसी तिथि में जारी आदेश में आर.एम.गुप्ता मुख्य परियोजना प्रबंधक आरा से लखनऊ, प्रदीप रत्नम महाप्रबंक लान से आगरा जबकि श्री रत्नम का गृह जनपद आगरा है। इसी तरह इसी तिथि में अषेश श्रीवास्तव मुख्य परियोजना प्रबंधक बरेली से आगरा उसी के दूसरे नि यानि आठ अप्रैल को वाराणसी तबादला रद्द करते हुए उन्हें बरेली का अतिरिक्त चार्ज ले देकर देने की चर्चा निगम में व्याप्त है।
इसी तिथि में डी. आर. विद्यार्थी मुख्य परियोजना प्रबंधक वाराणासी से लखनऊ और प्रवीन कुमार मुख्य परियोजना प्रबंधक मुरादाबाद से वाराणासी तथा श्याम बहादूर सहायक अभियंता मुरादाबाद से इलाहाबाद भेजे गए हेै। रविवार 8 अप्रैल को प्रमोद कुमार उप परियोजना प्रबंधक को फैजाबाद से लखनऊ तबादला किया गया हैं। इसके अलावा आठ अप्र्रैल को एक ऐसेे उप परियोजना प्रबंधक का तबादला किया गया जो दो माह पूर्व ही पदोन्नत हुए है, प्रशांत कुमार को लखनऊ से सुलतानपुर तथा वेद प्रकाश उप परियोजना प्रबधक को लखनऊ से हमीार पुर भेजा गया है। इसकी क्या जरूरत थी, सम्बंधित मंत्री से इसकी अनुमति ली गई या नही यह जाॅच का विषय है। लेकिन आज सेतु निगम में इन तबादलों की चर्चा दिन भर रही।
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