वाणिज्य कर के एडिश्नल कमिश्नर कानपुर केशवलाल के घर से आयकर विभाग को दस करोड़ रुपए कैश मिले


 

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lucknow | भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ छेड़े गए अभियान में आयकर विभाग को एक बड़ी कामयाबी मिली है। वाणिज्य कर के एडिश्नल कमिश्नर केशवलाल के घर से आयकर विभाग को दस करोड़ रुपए कैश मिले हैं। नोटबंदी के बाद नई करंसी में कालेधन की ये सबसे बड़ी बरामदगी है। कैश के अलावा दो किलो सोना, करोड़ों रुपए की प्रापर्टी के दस्तावेज भी बरामद कि गए हैं। देर रात तक उनके कानपुर और नोएडा स्थित आवास में जांच जारी थी।

आय से अधिक संपत्ति के मामले में शहर के दो दर्जन से ज्यादा सरकारी अधिकारी जांच की जद में आ गए हैं। मंगलवार को आयकर विभाग ने आरटीओ प्रवर्तन सुनीता वर्मा व उनके पति वाणिज्य कर ज्वाइंट कमिश्नर डीके वर्मा के आवास पर छापे मारे थे। 24 घंटे बाद ही वाणिज्य कर विभाग के वरिष्ठतम अधिकारी और एडीश्नल कमिश्नर ग्रेड-2 केशवलाल के आवासों पर भी आयकर अधिकारी पहुंच गए।

संयुक्त आयकर निदेशक जांच अमरेश कुमार तिवारी के निर्देश पर डिप्टी कमिश्नर गणेश सक्सेना ने उनके लखनपुर स्थित आ‌वास पर छापा मारा। उप निदेशक जांच वेदप्रकाश के नेतृत्व में दूसरी टीम ने नोएडा स्थित उनके आवास पर कार्यवाही की। छापे के दौरान केशवलाल लखनऊ में वाणिज्य कर सेवा संघ के अधिवेशन में हिस्सा लेने गए थे। यहां से आयकर अफसरों ने फोन करके उन्हें सूचित किया। शाम को वह लखनपुर स्थित आवास पहुंचे। तब प्राथमिक बयान दर्ज करने के बाद पड़ताल शुरू हुई।

 

जांच के दौरान आयकर अधिकारी उस समय दंग रह गए जब नए नए नोटों की गडिड्यां निकलना शुरू हो गईं। कानपुर व नोएडा के आवास में गद्दे, पलंग, अलमारी, लॉकर और कपड़ों के बीच नए करेंसी को दबाकर रखा गया था। देर रात तक दस करोड़ रुपए से ज्यादा कैश मिल चुका था। अभी रकम बढ़ने के पूरे आसार हैं। संयुक्त आयकर निदेशक जांच अमरेश तिवारी के मुताबिक नई करंसी में ये देश की सबसे बड़ी बरामदगी है। करोड़ों की इस रकम का स्रोत क्या है, इसका जवाब केशवलाल नहीं दे सके हैं।

 

इतना ही नहीं देर रात तक छानबीन में दर्जनों अघोषित संपत्ति के दस्तावेज मिल चुके थे। आयकर सूत्रों के मुताबिक लंबे समय से उनपर नजर रखी जा रही थी। आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार को लेकर लगातार शिकायतें आ रही थीं। जांच में उन्हें सही पाया गया। इसके बाद कार्यवाही को अंजाम दिया गया। मंगलवार को शताब्दी ट्रैवल्स पर छापों की कार्यवाही में आयकर अधिकारियों को संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं, जिसके संबंध वाणिज्य कर विभाग के एसआईबी विभाग से पाए गए हैं।


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