यूपी में लागू हो गया RERA बिना पॉलिसी बनाए ही


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लखनऊ: मोदी सरकार ने मकान खरीददारों के हितों की रक्षा के लिए रियल एस्टेट कानून (Real Estate Act) यानी रेरा बनाया है, जो देश में 1 मई 2017 से लागू हो गया है। इसके तहत देश के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को अपनी रेगुलेटरी अथॉरिटी बनानी होगी, जो कानून के मुताबिक नियम-कानून बनाएगी। लेकिन यूपी की योगी सरकार ने बिना पॉलिसी बनाए ही रेरा को लागू कर दिया है। बिल्डर्स और फ्लैट बायर्स हैं कंफ्यूज वहीं, रियल एस्टेट कानून को लेकर अब यूपी के बिल्डर्स और फ्लैट बायर्स कंफ्यूज हैं।
फ्लैट बायर्स एसोसिएशन और बिल्डर दोनों ही ड्राफ्ट पॉलिसी ना आने को लेकर कंफ्यूज हैं क्योंकि अब राज्य के पास महज 3 महीने का वक्त है, जिसमें उसे ट्राइब्यूनल नियुक्त करने के साथ-साथ अपनी नीति निर्धारित करना होगा। जानकारों की माने तो यूपी की योगी सरकार को इस संस्था को पूरी तरह से विकसित करने के लिए मेहनत करने की जरूरत है। क्‍या है रियल एस्टेट कानून – रियल एस्टेट कानून के तहत जुलाई तक सभी प्रॉजेक्ट्स का रजिस्ट्रेशन जरूरी है। – सभी मौजूदा प्रॉजेक्ट्स का रजिस्ट्रेशन संबंधित राज्यों की रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ में जुलाई 2017 तक हो जाना चाहिए। – रजिस्टर्ड प्रॉजेक्ट की पूरी जानकारी प्राधिकरण को दी जानी जरूरी है। – कानून के तहत अब यह आवश्यक हो गया है कि प्रॉजेक्ट पूरा होने की तारीख दी जाए।
– मकान बनाने वाला बिल्डर, डेवलेपर एक प्रॉजेक्ट का पैसा दूसरे में नहीं लगा सकता। – मोदी सरकार ने राज्यों को साफ कहा है कि प्रावधानों में बदलाव न किए जाएं। – रियल एस्टेट कानून के अनुसार, प्रोजेक्ट की बिक्री सुपर एरिया पर नहीं बल्कि कॉरपेट एरिया पर करनी होगी। – पजेशन में देरी होने या कंस्ट्रक्शन में दोषी पाए जाने पर बिल्डरों को ब्याज और जुर्माना दोनों देना होगा। – कोई बिल्डर ख़रीदार के साथ धोखाधड़ी का दोषी पाया जाता है तो उसे तीन साल की सज़ा का प्रावधान भी संसद द्वारा पास किए कानून में है। – इसके अलावा बिल्डरों को ख़रीदारों से लिया 70% पैसा प्रोजेक्ट के अकाउंट में ही रखना होगा। – सभी राज्यों में रियल एस्टेट अथॉरिटी होगी, जिसके साथ बिल्डरों और रियल एस्टेट एजेंट को रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

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