
इटावा. उत्तर प्रदेश के इटावा में इंसानियत को शर्मसार करने वाला सामने आया है. जिसमें एक 45 साल के पिता को रोते हुए अपने 15 साल के बेटे के शव को कंधे पर लादकर घर ले जा रहा है. ये मामला इटावा के विक्रमपुर गांव का है. यहां के रहने वाले उदयवीर सिंह के बेटे पुष्पेंद्र की तबियत सोमवार को अचानक खराब हो गई, इलाज कराने के लिए उदयवीर इटावा के जिला अस्पताल लाया था. उदयवीर का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों ने उसके बेटे का इलाज नहीं किया.
डॉक्टरों ने उसे बिना देखे ही मृत घोषित कर दिया और उसे अस्पताल से ले जाने के लिए कह दिया, बेटे की मौत के गम में डूबे उदयवीर ने अपने जिगर के टुकड़े को अपने सीने से लगाया और आंसू पोंछता हुआ घर के लिए रवाना हो गया. उदयवीर का कहना है कि वह दो बार अपने बेटे को अस्पताल लेकर आया था. उदयवीर का गांव अस्पताल से 7 किलोमीटर दूर है. डॉक्टरों ने पुष्पेंद्र के लिए एंबुलेंस तक की व्यवस्था नहीं कि जो कि गरीबों के लिए फ्री है. पिता को नहीं पता था कि अस्पताल से उसे मुफ्त एंबुलेंस की सुविधा मिल सकती है. अस्पताल के स्टाफ ने भी उनकी कोई मदद नहीं की. जिसकी वजह से उसने अपने बेटे के शव को कंधों पर उठा लिया और फिर बाइक से बॉडी को घर ले गया.
इस पूरी घटना को अस्पताल में मौजूद किसी शख्स ने अपने मोबाइल पर इसका वीडियो बना लिया था. और देखते ही देखते यह घटना सोशल मीडिया में वायरल हो गई. उदयवीर ने कहा कि किसी ने मुझे नहीं बताया कि मैं अपने बेटे के शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस का हकदार हूं या नहीं.
इस मामले पर सीएमओ डॉक्टर राजीव कुमार यादव का कहना है कि यह घटना शर्मनाक है. इस मामले में कार्रवाई की जाएगी. इससे अस्पताल की प्रतिष्ठा को धक्का लगा है और यह हमारी गलती है. उन्होंने बताया कि, ”एक बस एक्सीडेंट केस में उस वक्त डॉक्टर व्यस्त थे, इसलिए वह उदयवीर से यह नहीं पूछ सके कि, बॉडी को ले जाने के लिए उसको किसी शव वाहन की जरूरत है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही गरीबों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से हर संभव मदद देने की बात कर रहे हों लेकिन धरातल पर इसका कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है. प्रदेश के अस्पतालों में आए दिन इस तरह की घटना से न केवल मानवता शर्मसार हो रही है बल्कि सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं.
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