
लखनऊ,। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निजी घरानों से महंगी बिजली खरीद के करारों को रद्द करने का स्वागत करते हुए बिजली इन्जीनियरों ने कहा है कि यदि सरकारी क्षेत्र के बिजली घर बन्द करने की कोशिश हुई तो उसका प्रबल विरोध होगा । उल्लेखनीय है कि निजी घरानों के कुछ करार रद्द करने की खबरों के साथ एन टी पी सी और उप्र राज्य विद्युत् उत्पादन निगम के पनकी , हरदुआगंज और पारीछा बिजली घरों के बिजली क्रय करार भी रद्द होने के समाचारों से बिजली अभियन्ताओं में गुस्सा है।
आल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे , उप्रराविप अभियंता संघ के अध्यक्ष जी के मिश्र , महासचिव राजीव सिंह ने आज यहाँ जारी बयान में कहा कि बजाज एनर्जी के 90 -90 मेगावाट के पांच बिजली घरों से रु 07. 22 प्रति यूनिट की दर से वर्ष 2017 -18 में 1773 करोड़ रु की बिजली खरीदने का प्रस्ताव था जिसे निरस्त कर प्रदेश सरकार ने प्रशंसनीय कार्य किया है जिसके लिए मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा अभिनन्दन के पात्र हैं द्य अभियंताओं ने कहा कि राष्ट्र हित में उठाया गया यह बड़ा कदम है और इस मामले में बिजली इंजीनियर पूरी तरह सरकार के साथ हैं।
बिजली अभियंताओं ने कहा कि बिजली उत्पादन लागत के गलत आंकड़े देकर सरकारी क्षेत्र के पनकी , हरदुआगंज , पारीछा या किसी अन्य बिजली घर को बंद करने की कोशिश की गयी तो इसका प्रबल विरोध किया जाएगा। इस मामले में अभियंताओं ने मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से अपील की है कि सरकारी क्षेत्र के बिजली घरों के बारे में अभियंताओं को विश्वास में लिया जाए तो और इन बिजली घरों से और सस्ती बिजली का उत्पादन किया जा सकता है।
अभियंता पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2017 -18 में लगभग 128908 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी जानी है जिसमे निजी घरानों से 57580 मियू बिजली 25457 करोड़ रु में खरीदने का प्रस्ताव है जिसका औसत रु 04 .42 प्रति यूनिट आता है जबकि शेष 71328 मियू बिजली मुख्यतया सरकारी क्षेत्र से 27462 करोड़ रु में खरेदी जाएगी जिसका औसत रु 03. 85 प्रति यूनिट आता है जो निजी क्षेत्र की तुलना में काफी कम है ऐसे में सरकारी क्षेत्र के बिजली घरों को बंद करने के बजाये उन्हें और अधिक चलाने की जरूरत है।उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 -18 में बजाज से रु 07. 22 प्रति यूनिट की दर पर 1773 करोड़ रु की बिजली खरीदी जानी थी जिसे निरस्त कर उचित कदम उठाया गया है किन्तु अभी और करार रद्द किये जाने की आवश्यकता है जिनमे रिलायंस के रोजा से रु 05. 04 प्रति यूनिट की दर से 4093 करोड़ रु की बिजली , ललितपुर बजाज से रु 05. 04 प्रति यूनिट की दर पर 4730 करोड़ रु की बिजली और जी वी के श्रीनगर से रु 05. 84 प्रति यूनिट की दर पर 663 करोड़ रु की बिजली खरीदने का प्रस्ताव मुख्य है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार द्विपक्षीय समझौते के तहत खरीदी जाने वाली महंगी बिजली के सभी करार तत्काल रद्द किये जाने चाहिए।
अभियंताओं ने कहा कि बिजली घरों से बिजली खरीद के कुल (फिक्स एवं वेरिएबल लागत ) लागत की तुलना करें तो सरकारी क्षेत्र की बिजली सबसे सस्ती है किन्तु केवल वेरिएबल लागत के आधार पर यदि सरकारी क्षेत्र के बिजली घर बंद किये गए तो यह आम जनता के साथ धोखा होगा जिसका प्रबल विरोध किया जाएगा।
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