
लखनऊ। जिस समय योगी जी ने उत्तर प्रदेश की सत्ता सम्हाली थी लगा देर सबेर प्रदेश में रामराज्य का महौल बन जाएगा।लेकिन लगता है कि योगी जी को आईएएस अफसरों के साथ साथ उनके सहयोगियों ने भी घेरना शुरू कर दिया है। सरकार के शुरूआती दौर में दिल्ली तक से एक चर्चा चली थी कि योगी आदित्यनाथ को तबादले, ठेके पट्टे के लिए कोई भी जनप्रतिनिधि सिफारिश न करे लेकिन ऐसा अब शायद नही हो रहा है। यह सब बाॅत इस लिए सामने आ रही है कि तबादला नीति के तह्त प्रदेश में 30 जून तक थोक भाव में तबादले किए गए कुछ तबादले निरस्त हुए लेकिन वे उगलियों पर गिने जा सकते है। लेकिन लोक निर्माण विभाग में विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए यह तबादला सत्र 15 जुलाई तक बढ़ा दिया गया था।
अब यह तो विशेषाधिकार का मामला है, इस समय लोक निर्माण विभाग में सबसे खास चर्चा अधिशासी और अधीक्षण अभियंताओं के हुए लगभग 125 से अधिक तबादलों के मामला का है। सूत्र बताते है कि इनमें से लगभग 35 से 40 तबादले चार दिन के अन्दर निरस्त कर दिये गए। यही नही चीफ इंजीनियर राजन मित्तल का पहले झाॅसी का तबादला निरस्त कर उन्हें सीधे एमडी सेतु निगम बनाए जाने का मामला भी काफी चर्चा में रहा हैं।
लोक निर्माण विभाग में हुए थोक भाव के तबादलों को लेकर जो चर्चा चल रही है उसके मुताबिक विभागीय इंजीनियर्स के तबादलों में प्रदेश सरकार के मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर एक दो नही बल्कि सौ के करीब तबादले किए गए हैं। जब सरकार शुरू में ही अपना रूख स्पष्ट कर चुकी थी तो भी सिफारिश के आधार पर तबादले क्यों किये गए। यही नही तबादलों के लिए जब 15 जुलाई तक की तिथि तय थी तो क्या 16-17 में कोई सूची जारी की गई। 17 जुलाई को 714 अवर अभियंता के तबादले की सूचना दी गई। जबकि इसे दूसरे दिन यानि फिर एक चर्चा चली कल जो सूची जारी हुई थी वह सिविल की थी और आज मिली तबादला सूची इलेक्ट्रिक और यांत्रिक की हैं। सहायक अभियंताओं के मामले में भी इसी तरह का पेंच होने की चर्चा विभाग में है। लेकिन सबसे चैकाने वाली बाॅत यह कि जो सरकार सिफारिश या अन्य तरह की गतिविधियों से अपने आप को विरत बताने में चूकती नही उसी सरकार के इतने कम अरसे कार्यकाल में इस तरह की चर्चा अभी तो धीमी है लेकिन इसकी गूज भविष्य में दूर तलक जाएगी।
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