
lucknow | 2008 में जीडीए में भी हुई थी 4200 रुपये मीटर में वायर की खरीद एमडीए के आरोपी इंजीनियरों ने अपने बचाव में पेश किए जीडीए के दस्तावेज कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार बोले मंडल में जहां-जहां इस तरह हुई खरीद सबकी होगी जांच वायर घोटाला मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) में हुआ और जांच की आंच गाजियाबाद विकास प्राधिकरण तक पहुंच गई है।
वायर घोटाले में आरोपी इंजीनियरों ने अपने बचाव में जीडीए में इसी तरह 2008 में हुई वायर खरीद के दस्तावेज कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार के सामने पेश किए। जीडीए में आज से 9 साल पहले 4200 रुपये मीटर में इसी क्वालिटी के वायर की खरीद हो चुकी है। कमिश्नर ने कहा कि यह गंभीर मामला और जीडीए में हुई इस खरीद की विस्तृत जांच होगी। उन्होंने कहा कि मंडल में जहां कहीं भी ऐसा मामला है वहां जांच होगी।
कमिश्नर डा. प्रभात कुमार ने बताया कि मेरठ विकास प्राधिकरण के गिरफ्तार इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार के बड़े आरोप हैं। एक खास ठेकेदार को ही काम देने के मकसद से दोबारा टेंडर हुए। उसके बाद जो दरें लगाई गईं वह बाजार की दरों के मुकाबले दोगुने से ज्यादा थीं। बाजार से दरें मंगाई और एमडीए के आरोपी इंजीनियरों से भी उनका पक्ष पूछा। एमडीए के आरोपी इंजीनियरों ने बताया कि 2008 में जीडीए में 33 स्क्वायर मिमी केवीए की केबिल का रेट 4 हजार 282 है। इस पर जीडीए, एमडीए और पीवीएनएल के अफसरों से कोटेशन मंगाए गए तो उन्होंने इसकी दर 1800 रुपये मीटर के आसपास बताई।
इस मामले में जीडीए वीसी को भी चिट्ठी लिखकर कहा गया है कि वह 2008 की इस फाइल को निकलवाकर जांच करें कि आखिर तब इस वायर की दर 4 हजार 282 कैसे थी। कमिश्नर ने कहा कि ऐसे मामले जहां भी होंगे वहां जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जो भी भ्रष्टाचार करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में शासन को भी रिपोर्ट भेजी जा रही है।
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