
अत्याधुनिक तकनीक की मदद से पर्यावरण संरक्षण को नई दशा एवं दिशा दे रही है एनसीएल
नई दिल्ली | नए वर्ष की शुरुआत में ही पर्यावरण संरक्षण को अपना सबसे अहम संकल्प बता चुकी एनसीएल ने इस दिशा में सार्थक एवं समर्पित प्रयास को गति दी है। कंपनी ने अपने मशीनी बेड़े में 4 सरफेस माइनर शामिल किए हैं, जो पर्यावरणीय प्रबंधन में कंपनी की एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है। सरफेस माइनर एक ऐसी ईको-फ्रेंडली भारी मशीन (एचईएमएम) है, जो बिना ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग और क्रशिंग के कोयला खदानों से कोयला निकालती है। इन 4 सरफेस माइनर में से 2 कंपनी के मेगा प्रोजेक्ट जयंत में, 1 सरफेस माइनर मेगा प्रोजेक्ट दुधीचुआ में तथा 1 कृष्णशिला में लगाए गए हैं और इनसे कोयला उत्पादन का कार्य पूरी गति से किया जा रहा है।
जल्द ही कंपनी की जयंत एवं दुधीचुआ परियोजना का विस्तार होना है और इनकी मौजूदा वार्षिक कोयला उत्पादन क्षमता 10-10 मिलियन टन से बढ़कर 20-20 मिलियन टन होना है। कंपनी की इन परियोजनाओं के विस्तार से पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो तथा आसपास की रिहायशी आबादी को ब्लास्टिंग की परेशानी भी न झेलनी पड़े, इस उद्देश्य से ही एनसीएल ने अपने इन दोनों मेगा प्रोजेक्ट्स में विशेष रूप से सरफेस माइनर तैनात किए हैं। इस मशीन की एक और खासियत यह है कि यह माइनस 100 एमएम के तय साइज में कोयला निकालती है और इससे कोयले की गुणवत्ता बनी रहती है।
इतना ही नहीं, तकनीक की मदद से पर्यावरण संरक्षण को नई ऊंचाई देने हेतु लगातार प्रयासरत एनसीएल ने पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप भूमिगत जल की देखरेख के लिए अपने 8 खदान क्षेत्रों में 48 पीजोमीटर लगाए हैं, जिनकी मदद से भूमिगत जल के स्तर और गुणवत्ता की लगातार जांच की जाती है और इसकी रिपोर्ट सक्षम स्तर पर भेजी जाती है।
गौतरलब है कि के.एम.एल (कीहोल मार्क अप लैंग्वेज) तकनीक के माध्यम से एनसीएल द्वारा किए गए सभी वृक्षारोपण कार्य गूगल अर्थ पर उपलब्ध हैं तथा गूगल अर्थ के माध्यम से एनसीएल के वृक्षारोपण की लगातार मॉनिरटरिंग केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा की जाती है।
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