
05 जनवरी 2011 के बाद एम ओ यू के आधार पर बिजली उत्पादन गृह लगाने की अनुमति नही है
lucknow | उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट में निजी घरानो द्वारा बिजली उत्पादन गृहों के एम ओ यू साइन किये जाने पर सवाल उठाते हुए पर बिजली अभियन्ताओं ने कहा कि मौजदा नियमों के अनुसार 05 जनवरी 2011 के बाद एम ओ यू के आधार पर बिजली उत्पादन गृह लगाने की अनुमति नही है तो इन्वेस्टर्स समिट में निजी घरानों के साथ बिजली उत्पादन और पारेषण के एम ओ यू किस नियम के तहत साइन किये जा रहे है, यह सरकार को बताना चाहिए |
ऑल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने आज यहाँ कहा कि एम ओ यू के आधार पर बिजली उत्पादन गृह लगाने वाली निजी कम्पनियाँ मनमानी लागत बताकर बिजली उत्पादन की अधिक कीमत वसूलती थीं इसीलिए तत्कालीन केन्द्र सरकार ने 05 जनवरी 2011 के बाद एम ओ यू के आधार पर बिजली उत्पादन गृह लगाने की अनुमति समाप्त कर दी है और स्पष्ट आदेश जारी किये गए हैं कि केवल प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के आधार पर ही बिजली उत्पादन गृहों से बिजली खरीदी जा सकती है | ऐसे में अदानी द्वारा उत्तर प्रदेश में 1000 मेगावॉट के ताप बिजली घर , पारेषण लाइनों , पारेषण सब स्टेशनों और सोलर पॉवर प्लान्ट लगाने के एम ओ यू साइन किये जाने के समाचार से पॉवर सेक्टर में भ्रम का वातावरण बन गया है जिसे प्रदेश सरकार द्वारा स्पष्ट किया जाना चाहिए |
इसी प्रकार 10700 मेगावाट क्षमता के सोलर पावर प्लान्ट लगाने हेतु 46 निजी कंपनियों के साथ एम ओ यू साइन किये जाने के समाचार प्रकाशित हुए हैं जिनसे मिलने वाली बीजली की दरें क्या होंगी इसका स्पष्टीकरण होना अत्यंत आवश्यक है | उन्होंने कहा कि बिजली के क्षेत्र में पूंजी निवेश का स्वागत है किन्तु एम ओ यू के पहले आम जनता को यह पता होना चाहिए कि इस पूंजी निवेश से लगने वाले विद्युत् उत्पादन घरों से किस टैरिफ पर बिजली मिलेगी और क्या दरें प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के आधार पर तय की गयी हैं या टैरिफ के मामले में निवेशक की मनमानी चलेगी |
उन्होंने बताया कि बिजली खरीदने के लिए बिजली वितरण कम्पनियाँ टेंडर के जरिये प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के आधार पर निजी कंपनियों से बिजली की दरें मांगती हैं और सबसे कम रेट देने वाली कंपनी की दरों को नियामक आयोग के समक्ष रखा जाता है | उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 के सेक्शन 62 और 63 में दिए प्राविधानों के अनुसार बिजली उत्पादन गृहों से बिजली खरीद का टैरिफ तय करने का अधिकार केवल विद्युत् नियामक आयोग को है | नियामक आयोग की स्वीकृति मिलने के बाद निजी कम्पनियों के साथ एम ओ यू और बिजली क्रय करार किये जाते हैं |
इसी प्रकार रिन्यूएबल एनर्जी के मामले में भी इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 के सेक्शन 86 ए ,बी और ई के अनुसार विद्युत् नियामक आयोग को टैरिफ तय करने का अधिकार दिया गया है | उन्होंने सवाल किया कि यदि थर्मल पावर और सोलर पावर के एम ओ यू बिना प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के किये जा रहे हैं और इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 के प्राविधानों का पालन नहीं किया जा रहा है तो सरकार को यह भी बताना चाहिए कि निजी घरानों के साथ किये जा रहे एम ओ यू के अनुसार प्रदेश को इन घरानों से किस टैरिफ पर बिजली मिलेगी | उल्लेखनीय है कि प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के आधार पर सोलर पावर की दरें रु 02 .44 प्रति यूनिट तक आ गयी हैं | इसलिए भी यह जानना जरूरी है कि जिनके साथ एम् ओ यू किये गए हैं क्या इन एम् ओ यू में रु 02 .44 प्रति यूनिट की दरों पर प्रदेश को बिजली देने का उल्लेख है |
उन्होंने कहा कि यद्यपि 05 जनवरी 2011 के बाद एम ओ यू रुट समाप्त किया जा चुका है किन्तु इसके पहले एम ओ यू रुट से बने बजाज और रिलायन्स के रोजा बिजली घरों से काफी अधिक कीमत पर बिजली खरीदने का खामियाजा आज भी पॉवर कार्पोरेशन को भुगतना पड़ रहा है | कहीं ऐसा न हो कि नए एम् ओ यू प्रदेश के गले की हड्डी बन जाएँ | उन्होंने कहा कि महंगी बिजली खरीद की कीमत आम जनता को चुकानी पड़ती है अतः यदि ऐसा हुआ तो इसके विरोध में आम जनता को साथ लेकर संघर्ष किया जाएगा |
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