
lucknow . बीएसपी से निकाले गए नसीमुद्दीन गुरुवार को कांग्रेस में शामिल हो गए. दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राजबब्बर की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की. गुरुवार को कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद नसीमुद्दीन ने प्रेस कांफ्रेंस कर इसका औपचारिक ऐलान किया.
उन्होंने कहा कि मायावती के साथ जुड़ना उनकी सबसे बड़ी गलती थी. उन्होंने कहा कि अब उन्हें यह गलती सुधारने का मौका मिला है. अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल होने पर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी को कांग्रेस में विलय कर दिया है. कांग्रेस नेता राज बब्बर और गुलाम नबी आजाद ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी का पार्टी शामिल होने पर उनका स्वागत किया.
बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों और 2014 लोकसभा चुनाव में नसीमुद्दीन सिद्दीकी बीएसपी के प्रभारी रह चुके हैं. बुंदेलखंड के बांदा जिले के रहने वाले सिद्दीकी की पहचान मुस्लिम चेहरे के रूप में थी. यही वजह थी कि मायावती की सभी सरकारों में वे मंत्री रहे. निष्कासन के बाद सिद्दीकी ने राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा की स्थापना की थी. बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उन्हें व उनके बेटे को पार्टी से निकाल दिया था. इस कार्रवाई से नाराज नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भी मायावती से कथित बातचीत का टेप जारी करते हुए पार्टी के लिए पैसे मांगने का आरोप लगाया था. पिछले 10 महीने से नसीमुद्दीन सिद्दीकी अपने नए और मजबूत राजनैतिक ठिकाने की तलाश में थे. सियासी जानकारों का कहना है कि नए सियासी ठिकाने के रूप में नसीमुद्दीन के लिए कांग्रेस से ज्यादा अहमियत समाजवादी पार्टी की थी. लेकिन, समाजवादी पार्टी में पहले से ही मुस्लिम राजनीति के ध्रुवों की वजह से वे कामयाब नहीं हो सके. आखिर में उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामने का फैसला किया.
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