
मंडी परिषद के अधिकारियों की लापरवाही से सरकार की साख भी प्रभावित
लखनऊ । पीएम मोदी और सीएम योगी का जोर सोशल मीडिया पर है कि सरकारी विभाग अपनी योजनाओं की जानकारी आमजनता तक पहुंचने के लिए अधिक से अधिक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें । सीएम योगी के इन निर्देशों का उन्हीं का एक विभाग मंडी परिषद नही मान रहा है जबकि योगी परिषद के अध्यक्ष भी हैं । मंडी परिषद के अधिकारियों की इस घनघोर लापरवाही से सरकार की साख भी प्रभावित हो रही है ।
यूपी में भाजपा सरकार और योगी के सीएम बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री का पूरा जोर इस बात पर है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी जल्द से जल्द समाज के निचले तबके यानी आम आदमी तक पहुंचे । इसके लिए आज का सबसे तेज माध्यम सोशल मीडिया का सभी विभागों द्वारा उपयोग किया जाये । यूपी का एक विभाग मंडी परिषद ,सीएम के इस आदेश की खुलेआम धज्जियां उडा रहा है ।

मंडी परिषद ने आम जनता व किसानों को जानकारी देने के लिए फेसबुक व टि्वटर पर पेज तो जरूर बनाया है पर उस पर से जानकारी गायब है । फेसबुक पेज पर मंडी अधिकारियों ने एक अगस्त 2015, को एक पोस्ट कर आखरी जानकारी दी है । इसी तरह टि्वटर अकाउंट पर भी मंडी परिषद की ओर से मात्र दो टि्वट किये गये है वह भी 13, अगस्त 2015, को उसके बाद से सोशल मीडिया के इन दो मुख्य प्लेटफार्म की ओर मंडी के अधिकारियों ने आज तीसरे साल तक देखा ही नहीं है । फेसबुक पेज कल अपडेट किया है कुछ ,लेकिन टि्वटर वैसा ही है ।
आज जब की यूपी के अधिकतर सरकारी विभाग फेसबुक व टि्वटर का अधिक से अधिक उपयोग कर रहे हैं , वही मंडी के अधिकारी सरकारी आदेशों का अनुपालन भी नहीं कर रहे हैं यह उनकी घनघोर लापरवाही है ।
अभी कल ही कैबिनेट में मंडी से किसानों को जोड़ने के लिए एक ऐप की जानकारी दी गई है पर अपने फेसबुक व टि्वटर पेज के बारे में अधिकारियों ने नहीं बताया कि इस माध्यम का वह कितना उपयोग कर रहे हैं ।
मंडी परिषद इस सरकार में लगातार चर्चा में है , मंडी निदेशक की कार्यप्रणाली व मुख्य अभियंता रहे जे के सिंह के भष्टाचार के मामलों से उस की छवि में लगातार गिरावट आई है ।
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