
सालभर में 17 सौ करोड़ रुपए की धनराशि व्यय ही नहीं की गई है तो किसानों
को कितनी सुविधाएं व सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा होगा
—-आनन्द शुक्ल—-
लखनऊ । योगी सरकार के लिए आने वाले दिनों में मंडी परिषद के निदेशक धीरज कुमार नयी मुसीबत खड़ी कर सकते हैं । किसानों के हितों व उनको सुविधाएं देने के लिए खर्च किया जाने वाला इस वित्तीय वर्ष में करीब 17 सौ करोड़ रूपया अभी तक खर्च ही नहीं किया गया है , जबकि मार्च का महीना खत्म होने वाला है ।
योगी सरकार किसानों के लिए कई योजनाऐ व सुविधा देने के लिए प्रयासरत हैं लेकिन जब सालभर में 17 सौ करोड़ रुपए की धनराशि व्यय ही नहीं की गई है तो किसानों को कितनी सुविधाएं व सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा होगा , सवालों के घेरे में है ।
भाजपा सरकार गठन के बाद महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी धीरज कुमार को मंडी निदेशक बनाया गया । सरकार किसानों के करीब पहुंच सके व उन को ज्यादा से ज्यादा सरकारी योजनाओं का लाभ दे सके इसी लिए सीएम योगी स्वयं मंडी परिषद के अध्यक्ष बने । जानकारी के अनुसार इस वित्तीय वर्ष में 19सौ करोड़ रुपए का बजट है मंडी परिषद का जिससे विकास कार्य किए जाने है, किसानों के लिए योजनाएं , मंडी बनाने, सड़क बनाने के लिए ।
लेकिन अभी तक केवल 208 करोड़ रुपए ही खर्च किया गया है बाकी करीब 17 सौ करोड़ रुपए खर्च ही नहीं किए गए हैं । जब इतनी बड़ी धनराशि किसानों के लिए अभी तक खर्च ही नहीं की गई है तो उनको सरकार की योजनाओं का कितना लाभ मिला होगा आसानी से सोचा जा सकता है ।
मंडी निदेशक धीरज कुमार की कार्यप्रणाली को भी लेकर मंडी के ही तमाम अधिकारियों में विरोधाभास है । हैं । मंडी में अभी तक जो विकास कार्य हुए हैं उनका भुगतान भी नहीं किया जा रहा है ।
बरहाल अब विरोधी दल भी किसानों के हितों के लिए काम करने का दावा करने वाली योगी सरकार के मंडी निदेशक धीरज कुमार के इस कारनामे के खिलाफ आवाज उठाने वाले हैं
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