विद्युत् कर्मचारी समिति ने पांच शहरों की बिजली व्यस्था निजी घरानों को सौंपने के निर्णय पर मुख्यमंत्री से पुनर्विचार की माँग की


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17 मार्च को संघर्ष समिति की लखनऊ में आपात बैठक में संघर्ष की रणनीति और निर्णय लिए जायेंगे 

लखनऊ |  विद्युत् कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति , उप्र  ने  आज  यू पी कैबिनेट द्वारा पांच शहरों की  बिजली व्यस्था निजी घरानों को सौंपने के निर्णय पर मुख्यमंत्री से पुनर्विचार की माँग  की है और इस बाबत  संघर्ष की रणनीति  तय करने हेतु 17 मार्च को  लखनऊ में संघर्ष समिति की आपात बैठक बुलाई गयी है |

विद्युत् कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति , उप्र  के संयोजक शैलेन्द्र दुबे और प्रमुख पदाधिकारियों राजीव सिंह , गिरीश पाण्डे , सदरुद्दीन राना ,राजेन्द्र घिल्डियाल ,बिपिन प्रकाश वर्मा ,सुहेल आबिद ,पी एन राय ,पवन श्रीवास्तव ,परशुराम ,पूसे लाल ,ए के श्रीवास्तव ने आज बयान जारी कर प्रदेश के मुख्य मन्त्री श्री योगी आदित्यनाथ से इस निर्णय पर व्यापक जनहित में पुनर्विचार करने की अपील की है |  समिति के पदाधिकारियों ने कहा है कि योगी सरकार अपने कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में ले कर निजीकरण के बजाय गुजरात मॉडल के आधार पर बिजली व्यवस्था में सुधार का निर्णय ले तो एक साल में ही गुणात्मक सुधार किया जा सकता है | संघर्ष समिति सरकार बनने के बाद से ही उप्र में बिजली के क्षेत्र में गुजरात मॉडल लागू करने की मांग करता रहा है | उल्लेखनीय है कि गुजरात में किसी शहर में फ्रेंचाइजी नहीं है और सरकारी बिजली निगम कार्य कर रहे हैं |

संघर्ष समिति ने सात जनपदों के निजीकरण की चल रही प्रक्रिया और आज लिए गए निर्णय के अनुसार लखनऊ ,वाराणसी ,गोरखपुर ,मेरठ और मुरादाबाद शहरों को निजी फ्रेंचाइजी को सौंपने के निर्णय के विरोध में संघर्ष की रणनीति तय करने हेतु 17 मार्च को आपात मीटिंग बुलाई है | समिति ने स्पष्ट कहा है कि उपभोक्ताओं के व्यापक हित  में निजीकरण का पुरजोर विरोध किया जाएगा |


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