बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में सांसदों व विधायकों को ज्ञापन दो अभियान शुरू


BIJALI-30

लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर 28 मार्च से प्रारम्भ नियमानुसार कार्य आन्दोलन आज तीसरे दिन भी जारी रहा। इसी के साथ बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध मंे प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों ने सांसदों व विधायकों से मिलकर ज्ञापन दो अभियान शुरू कर दिया है।

ज्ञापन दो अभियान का असर दिखने लगा है। राजधानी लखनऊ के संसद सदस्य कौशल किशोर और कई भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बिजली वितरण के निजीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग की है। सांसद कौशल किशोर ने पत्र में लिखा है कि यह सर्वविदित है कि निजी क्षेत्र का एकमात्र उद्देश्य मुनाफा कमाना है और वह सार्वजनिक क्षेत्र का विकल्प कभी नहीं हो सकता। अतः निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार किया जाये। वाराणसी कैन्ट के भाजपा विधायक रवीन्द्र जायसवाल, मलिहाबाद की भाजपा विधायक जय देवी, वाराणसी के विधायक और अपना दल विधान मंडल दल के नेता नील रतन सिंह पटेल ‘नीलू’, रोहनियां वाराणसी के विधायक सुरेन्द्र नारायण सिंह, मेरठ शहर के विधायक रफीक अन्सारी, भाजपा के वाराणसी के विधान परिषद सदस्य केदार नाथ सिंह के नाम उन प्रमुख जन प्रतिनिधियों में है जिन्होंने संघर्ष समिति के ज्ञापन दो अभियान के बाद आज मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर निजीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग की है।

उधर संघर्ष समिति के आह्वान पर चल रहा नियमानुसार कार्य आन्दोलन आज और तेज हो गया। अवकाश होते हुए प्रबन्धन ने दफ्तर खोलने के आदेश जारी किये थे किन्तु प्रदेश भर में कर्मचारियों व अभियन्ताओं ने नियमानुसार कार्य आन्दोलन के तहत कार्यालयों का बहिष्कार किया और दफ्तरों पर ताले पड़े रहे। नियमानुसार कार्य के अन्तर्गत बिजली कर्मचारी अवकाश के दिनों में कार्य नहीं कर रहे हैं और सामान्य दिनों में शाम 05 बजे के बाद से अगले दिन सुबह 10 बजे तक कार्य नहीं कर रहे हैं। इसके साथ ही आन्दोलन के 12वें दिन आज प्रदेश भर में परियोजना व जनपद मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन जारी रहे।

हाईडिल फील्ड हाॅस्टल में हुई संघर्ष मिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सरकार व प्रबन्धन के हठवादी रवैये को देखते हुए बिजली कर्मचारियों को आन्दोलन और तेज करने के निर्देश दिये गये है। आन्दोलन के कार्यक्रमों के अन्तर्गत बिजली उत्पादन गृहों, पारेषण व वितरण में नियमानुसार कार्य आन्दोलन और प्रभावी करने के निर्देश दिये गये हैं। साथ ही 09 अप्रैल को सुबह 08 बजे से 12 अप्रैल की सुबह 08 बजे तक 72 घण्टे का कार्य बहिष्कार सफल बनाने की रणनीति तय की गयी।

संघर्ष समिति की बैठक में शैलेन्द्र दुबे, राजीव सिंह, गिरीश पाण्डेय, सदरूदद्ीन राना, विपिन प्रकाश वर्मा, सुहैल आबिद, राजेन्द्र घिल्डियाल, परशुराम, पी एन राय, पूसे लाल, ए के श्रीवास्तव, महेन्द्र राय, शशिकान्त श्रीवास्तव, करतार प्रसाद, के एस रावत, पी एन तिवारी, आर एस वर्मा, रामनाथ यादव, पवन श्रीवास्तव, शम्भू रत्न दीक्षित, कुलेन्द्र प्रताप सिंह, मो इलियास मुख्यतया उपस्थित थे।


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