पूर्व सीएम को सरकारी आवास की सुविधा का प्रावधान रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने लिया फैसला


 

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लखनऊ. पूर्व सीएम को आजीवन सरकारी बंगले की सुविधाओं को चुनौती देने वाली याचिका सोमवार को रंग लाई. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इन सरकारी बंगलों को खाली कराने के फैसले में रोड़ा बने प्रदेश सरकार के कानून को रद्द कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब प्रदेश के पूर्व सीएम को सरकारी बंगला खाली करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम के लिए दी जानी वाली सरकारी आवास की सुविधा को खत्म कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, बीएसपी सुप्रीमो मायावती के अलावा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, राजस्थान के गवर्नर कल्याण सिंह, बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल, नारायण दत्त तिवारी को मिलने वाली सरकारी आवास की सुविधा जल्द खत्म होगी.
बता दें कि ये सभी प्रदेश के सीएम पद पर रह चुके हैं और प्रदेश सरकार की ओर से दी जाने वाली सरकारी आवास की सुविधाओं का लाभ उठाते आ रहे हैं. इन सभी के नाम पर प्रदेश की राजधानी में बकायदा बंगला आवंटित हैं और इसके सरकारी रखरखाव के साथ ही सुरक्षा आदि पर लाखों रुपये का मासिक खर्च आता है. यह भी बता दें कि प्रदेश में पूर्व सीएम को उम्र भर के लिए दिए जाने वाले सरकारी आवास की सुविधा को लेकर एनजीओ ‘लोक प्रहरी’ ने एक याचिका दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट में अगस्त 2017 में एक विशेष अनुमति याचिका में एनजीओ ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को ताउम्र सरकारी खर्च पर इस तरह के बंगले देने को गैरकानूनी बताया था. इससे पहले वर्ष 197 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व सीएम को सरकारी आवास दिए जाने पर ऐतराज जाहिर करते हुए इन्हें खाली कराने का आदेश दिया था.
इस आदेश के बाद वीपी सिंह, कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा और श्रीपति मिश्र के नाम एलॉट सरकारी बंगलों को खाली कराया गया था. लेकिन, मायावती की गठबंधन सरकार ने एक्स चीफ मिनिस्टर्स रेजिडेंस अलॉटमेंट रूल्स 1997 के जरिए इस सुविधा को कानूनीजामा पहना दिया. इस कानून के पास होने के बाद सीएम मायावती के लिए माल एवेन्यू में एक आलीशान बंगला तैयार कराया गया. सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार के इस कानून को अमान्य करार देते हुए इसे रद्द कर दिया. इस तरह से पूर्व सीएम को सरकारी आवास की सुविधा को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के अमल में लाए जाने की सुप्रीम कोर्ट ने राह आसान कर दी है.


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