
लखनऊ| मिशन 2019 को ध्यान में रखकर बीजेपी को घेरने की तैयारियों में जुटीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती खुद मुश्किलों में घिरती नजर आ रही हैं. उनके कार्यकाल के दौरान प्रदेश की 21 चीनी मिलों के बेचने के मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है. कहा जा रहा है कि इन मिलों के बेचने से प्रदेश सरकार को 1,179 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. बता दें कि बीएसपी से निकाले जाने के बाद मायावती की सरकार में कद्दावर मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने चीनी मिलों के सौदे पर सवाल खड़े किए थे. वर्ष 2007 से 2012 के दौरान प्रदेश की सीएम रहीं मायावती और उनके राइट हैंड कहे जाने वाले सतीश चंद्र मिश्रा के इशारे पर यह सौदा किए जाने का आरोप भी उन्होंने लगाया था. हालांकि मायावती ने इन आरोपों पर अपना बचाव करते हुए कहा था कि चीनी मिलों के लिए जो आदेश हुए थे, उस पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी के दस्तखत थे.
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इन आरोपों के बाद मायावती सरकार में चीनी मिलों के बेचने के मामले में घोटाले का मुद्दा भी खासा उछला. बीएसपी सरकार में 21 चीनी मिलों को बेचा गया था. इनमें से 10 शुगर मिल उस दौरान बकायदा चल रही थीं. कहा जा रहा है कि इन मिलों को बाजार की कीमतों से बहुत कम दामों पर बेचा गया. ये मिल पांच सौ हेक्टेयर जमीन पर बनी थीं, जिसकी कीमत ही दो हजार करोड़ रुपये थी. मायावती सरकार के दौरान चीनी मिलों को लेकर इस सौदे की जांच के लिए प्रदेश सरकार के मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीबीआई को पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने लिखा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाई गईं बोगस कंपनियों को ये 21 चीनी मिलें बेंची गईं. इसमें देवरिया, बरेली, हरदोई, चित्तौनी, लक्ष्मीगंज, रामकोला और बाराबंकी की बंद पड़ी शुगर मिलें भी शामिल थीं. बीजेपी की मौजूदा प्रदेश सरकार ने इसको लेकर एक नोटिफिकेशन भी जारी किया. इसमें यह आशंका भी जाहिर की कि इसमें प्रदेश के बाहर दोषियों के शामिल होने की भी बात कही. इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई कराने की बात पर जोर दिया.
प्रमुख सचिव गृह के मुताबिक नीलाम की गईं चीनी मिलों में तमाम गड़बड़ियां पाई गई थीं. इन गड़बड़ियों को देखते हुए सीबीआई को जांच सौंपी गई है. सीबीआई के जांच शुरू करते ही इस मामले में मायावती आदि के खिलाफ एफआईआर किसी भी वक्त दर्ज की जा सकती है. इस सौदे में नेताओं और अधिकारियों व कारोबारियों की भूमिका के सभी पहलुओं की सीबीआई जांच करेगी. प्रदेश सरकार ने सीबीआई को इस मामले की जांच के लिए वर्ष 2017 में गोमती नगर थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर की कॉपी भी सौंपी है. इसमें नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और गिरासो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड का नाम शामिल था. इन दो कंपनियों ने भी चीनी मिलों को खरीदा था. कहा जा रहा है कि सरकार को जांच के दौरान इन दोनों कंपनियों के बोगल होने की जानकारी हासिल हुई है. बता दें कि सीएजी जांच में भी चीनी मिलों की बिक्री को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया था. मायावती सरकार के दौरान ही नहीं समाजवादी पार्टी की सरकार में मुलायम सिंह ने भी चीनी मिलों को बेचने की कोशिश की थी. लेकिन, हाई कोर्ट के दखल से यह सौदा रूक गया था. बीएसपी सरकार में चीनी मिलें बेचे जाने को लेकर समाजवादी सरकार में जांच होने की बात कही जा रही थी. सीएजी ने इस सौदे में वित्तीय गड़बड़ियों की रिपोर्ट अखिलेश सरकार को सौंपी थी. नवंबर 2012 में लोकायुक्त को इसकी जांच भी सौंपी गई, लेकिन लोकायुक्त की डेढ़ साल तक चली जांच में इसमें कोई घोटाला पकड़ में नहीं आया था.
https://rashtriyadinmaan.com
