
महाविद्यालय प्रबन्धन की गुलामी से ग्रसित है इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव !!
राज्यपाल और मुख्यमंत्री के आदेश की उड़ायी जा रही है कुलपति व कुलसचिव द्वारा धज्जियां
15 अनुमोदित शिक्षको की जगह मात्र 05 के के सहारे एक दशक से चल रही है उच्च शिक्षा
lucknow |यूपी में उच्च शिक्षा के सुधार के चाहे जितने दावे करे परन्तु आज भी महाविद्यालयों विशेष कर ग्रामीण क्षेत्र के कालेजों में अच्छी स्थिति नहीं है । यह मामला इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय से सम्बद्ध अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय लाला लक्ष्मी नारायण पी.जी.कालेज सिरसा (कुलसचिव के अनुसार स्ववित्तपोषित महाविद्यालय) के बी.एड.संकाय में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितता एवं शिक्षक विहीनता से जुड़ा हुआ है। जहाँ पर कुलपति के आशीर्वाद तथा कुलसचिव व महाविद्यालय प्राचार्य/प्रबन्धक की मिलीभगत से 15 अनुमोदित शिक्षको के एवज में मात्र 05 अनुमोदित शिक्षको के भरोसे पर विगत एक दशक से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में चार चांद लगाया जा रहा है।
महाविद्यालय प्रबन्धन की तानाशाही एवं विश्वविद्यालय अधिकारियो की मिलीभगत का ही परिणाम रहा है कि महाविद्यालय में बी.एड.विभाध्यक्ष के पद पर कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षक डां.दीपक शुक्ला को महज इसलिए आचरणहीनता का आरोप लगाकर निस्कासित कर दिया गयाकि डां.शुक्ला द्वारा शासनादेश के अनुरुप वेतन एवं इ.पी.एफ.कटौती की मांग कर दी गयी थी।
जिसके सन्दर्भ में न्याय के लिए डां.दीपक शुक्ला कानून की दुहाई देने व इमानदारी व नैतिकता का पाठ पढाने वाली योगी आदित्यनाथ की सरकार में भी दर दर की ठोकरें खा रहा हैकिन्तु कार्यवाही के नाम पर कुलपति व कुलसचिव इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय द्वारा राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के आदेशो को भी धता बता कर महाविद्यालय प्रबन्धतंत्र धन बल व रसूख के सामने अपनी अस्मिता को भी गिरवी रख चुके है।
डां.दीपक शुक्ला द्वारा की गयी दर्जनों शिकायतो के बावजूद आज तक मामले का न तो निस्तारण हो सका है और न ही महाविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अनियमितता की जांच ही करवायी जा रही है। जबकि डां.शुक्ला के शिकायती पत्र दिनांक 12.01.2018 का संज्ञान लेते हुए राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर निदेशक उच्च शिक्षा इलाहाबाद द्वारा जांच समिति का गठन कर जांच के लिए आदेशित भी किया गया था। जिस पर जांच समिति में शामिल रहे प्रो.जे.एन.मिश्र, डां.विनीता यादव बी.आर.अम्बेडकर राजकीय महाविद्यालय फतेहपुर एवं डां.दीप्ति मिश्र उप कुलसचिव इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय द्वारा प्रबन्धन के दबाव में एक तरफा शिकायतकर्ता को ही दोषी बता दिया गया। किन्तु जांच समिति द्वारा अपनी आख्या दिनांक 15.02.2018 के आधार पर महाविद्यालय में भ्रष्टाचार व अनियमितता को स्वीकार भी किया गया है, कैसे ? जांच समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर ही महाविद्यालय के बी.एड.पाठ्यक्रम में मानक के अनुरुप शिक्षक न होने पर सत्र 2018-20 में प्रवेश प्रतिबन्धित किया गया है बावजूद इसके महाविद्यालय द्वारा 15 अनुमोदित शिक्षको जगह मात्र 04 अनुमोदित शिक्षको के भरोसे जांच समिति की रिपोर्ट को दरकिनार कर सत्र 2018-20 हेतु कुलपति व कुलसचिव के प्रश्रय से काउन्सिलिंग धड़ल्ले से करवायी जा रही है।
कुलपति एवं कुलसचिव इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय तो महाविद्यालय प्रबन्धन के आगे स्वयं को इस कदर गिरवी रख चुके हैकि इन दोनो अधिकारियो को नियम कानून व शासनादेशो की कोई फिकर ही नही है। कि डां.शुक्ला द्वारा महाविद्यालय की जनसूचना जो 24.5.2018 के द्वारा कुलसचिव से मांगी गयी तो कुलसचिव महाविद्यालय से ही सूचना मांग रहे है। यह कितना शर्मनाक व हास्यास्पद है कि महाविद्यालय प्रबन्धन की अंध भक्ति में लीन कुलसचिव द्वारा लाला लक्ष्मी नारायण पी.जी.कालेज सिरसा को ही अपनी जनसूचना की आख्या में इस आशय के साथ स्ववित्तपोषित (निजी)महाविद्यालय बता दिया गयाकि उक्त की जांच का अधिकार विश्वविद्यालय को ही नही है।
सख़्त आदेश व त्वरित कार्यवाही का गीत गाने वाली योगी सरकार को भी डां.शुक्ला द्वारा दर्जनो जनसुनवाई एवं दर्जनो रजिस्टर्ड पत्रो के प्रेषण के बावजूद कुलपति कुलसचिव एवं महाविद्यालय प्रबन्धन की सांठ गांठ के आगे कार्यवाही के नाम पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री व निदेशक उच्च शिक्षा के दिनांक 15.03.18,18.04.18, 23.05.18, एवं 28.05.2018 के आदेशो को पैरो तले रौंदा जा रहा है।
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