अभियंत्रण विभागों की जिम्मेदारी अभियंत्रण विशेषज्ञों को सौपी जाए


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यूपीईए ने प्रदेश सरकार से केन्द्र सरकार की तर्ज पर काम करने का अनुरोध किया
लखनऊ। उत्तर प्रदेश इंजीनियर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश के अभियंत्रण सेवा विभागों में  साहसिक निर्णय की उ.प्र. में भी अति आवश्यकता है ताकि उच्च सचिवालय के नीतिगत निर्णय के स्तर पर विशेषज्ञ सेवाओं के ज्ञाताओं की तैनाती हो, जिससे प्रदेश के विकास में तेजी आ सके।

यथा-समस्त अभियंत्रण विभागों में तथा प्रदेश की समस्त विशेषज्ञ सेवाओं में विभागाध्यक्ष तथा सचिवालयों में सचिव/प्रमुख सचिव/अपर मुख्य सचिव स्तर पर जहाॅ नीतिगत महत्वपूर्ण निर्णय लिये जाते हैं, अभियंत्रण विभागों में विशेषज्ञ सेवाओं के ज्ञाताओं की ही तैनाती करने का प्रदेश सरकार साहसिक निर्णय ले, जो प्रदेश के विकास एवं प्रदेश की जनता के हित में भी होगा व इसके दूरगामी अच्छे परिणाम अवश्य ही आयेंगे। यद्यपि इसमें नौकरशाह पूर्ण अड़ंगा डालेंगे एवं सचिवालय के शीर्ष पदों पर विशेषज्ञों की तैनाती का विरोध के साथ-साथ इसके असफल करने का पूर्ण प्रयास करेंगे।
वर्तमान केन्द्र सरकार द्वारा 10 जून, 2018 को केन्द्रीय सचिवालय के संयुक्त सचिव स्तर के 10 पदों हेतु प्रासंगिक तौर पर की जाने वाली सीधी भर्ती हेतु लिये जाने वाले एक बड़े एवं साहसिक निर्णय लेने के लिए वर्तमान केन्द्र सरकार एवं विशेषकर श्री नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री  बधाई एवं साधुवाद के पात्र हैं। इससे विशेषज्ञ सेवाओं के प्रतिभाओं के नये द्वार व अवसर खुलेंगे। पूर्व में भी इस प्रकार के प्रयोग किये गये जो कि पूर्णतः सफल रहे हैं। इसका प्रारम्भ सर्वप्रथम श्री मुरारजी देसाई के प्रधान मंत्रित्वकाल में केन्द्रीय सचिवालय में सचिव स्तर पर वित्त विशेषज्ञ डा. मनमोहन सिंह जी (पूर्व प्रधानमंत्री) को वित्त मंत्रालय में वित्त सचिव, कृषि वैज्ञानिक डा. एम.एस. स्वामीनाथन को कृषि सचिव, रसायन शास्त्री डा. लवराज कुमार को पेट्रोलियम सचिव तथा रक्षा सचिव के पद पर अभियंत्रण संवर्ग से नियुक्ति की गई थी। प्रयोग पूर्णतः सफल रहा। इस प्रकार भारत सरकार के केन्द्रीय सचिवालय में विशेषज्ञ सेवाओं के कई सचिव की तैनाती पूर्व में भी की गई जो कि पूर्णतः व्यवहारिक तथा सफल रही। इसी प्रकार वर्ष 1977 से लेकर आज तक डा. आई.जी. पटेल, डा. मनमोहन सिंह,  डा.रघुराज राजन एवं डा.उर्जित पटेल वित्त विशेषज्ञ गैर आई.ए.एस. संवर्ग से रिजर्व बैंक के गवर्नर के पद पर नियुक्ति की गई, जिसे एक सफलतम् प्रयोग पाया गया।
उत्तर प्रदेश इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव सुरजीत सिंह निरंजन ने कहा कि वर्तमान में देश के कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात इत्यादि 13 प्रदेशों में अभियंत्रण विभागों के सचिव/प्रमुख सचिव/अपर मुख्य सचिव स्तर पर अभियंत्रण संवर्ग के ही शीर्षस्थ अभियंताओं की तैनाती की जाती है, जिसके परिणाम अच्छे रहे हैं। इसी प्रकार उ.प्र. में सुश्री मायावती ने पायलेट रहे शशांक शेखर सिंह को कैबिनेट सचिव बनाया गया प्रयोग पूर्ण सफल रहा, परन्तु नीति आयोग की सिफारिश के क्रम में नीतिगत स्तर पर विषेशज्ञ की भर्तियों का नौकरशाहों ने अपने हित में व अपना एकाधिकार सुरक्षित रखने हेतु हमेशा विरोध किया तथा इस प्रकार विशेषज्ञ ज्ञाताओं की तैनाती होने पर उनको असफल करने हेतु पूरा जोर भी लगाया गया, परन्तु नौकरशाह इसमें सफल नहीं हुए।
एसोसिएशन का पुनः सरकार से अनुरोध है कि केन्द्र की भाॅति उत्तर प्रदेश में भी उ.प. सरकार साहसिक निर्णय लेकर अभियंताओं/समस्त विशेषज्ञ सेवा संवर्ग के शीर्षस्थ एवं ज्ञाताओं की तैनाती सचिवालय के नीतिगत निर्णय के पदों-सचिव/प्रमुख सचिव/अपर मुख्य सचिव के पद पर करने की नीति अतिशीघ्र लागू करेगी, क्योंकि जिलाधिकारियों, कमिश्नर एवं राजस्व परिषद के पद ही आई.ए.एस. संवर्ग के कैडर पद हैं। इसके अलावा आई.ए.एस. की तैनाती के समस्त पद आई.ए.एस. के नान कैडर पद हैं।

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