
शादी-ब्याह से करोड़ों कमाने पर खेल विभाग समेत कई को हाईकोर्ट का नोटिस
लखनऊ बेंच में दाखिल की गई है जनहित याचिका
लखनऊ: यूपी बैडमिन्टन एकेडमी से की जा रही करोडों की अवैध कमाई पर अब हाईकोर्ट की नजरें टेढी हो गई हैं। उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में दाखिल जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय ने खेल विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण व बैडमिन्टन एकेडमी समेत सभी जिम्मेदार पक्षों को नोटिस जारी किया है। ज्ञात हो कि बैडमिन्टन एकेडमी को बनाने के लिए जमीन से लेकर बिल्डिंग बनाने तक का करोड़ों रूपया सरकार ने दिया था। लखनऊ विकास प्राधिकरण और बैडमिन्टन एकेडमी के बीच हुए करार में स्पष्ट तौर पर लिखा था कि जमीन जिस प्रायोजन के लिए दी जा रही है, उसके अतिरिक्त और कोई इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। साथ ही खेल विभाग के माध्यम से बैडमिन्टन एकेडमी को एक करोड़ से अधिक की रकम दी गई थी। इसके बावजूद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने नियमों को धता बताते हुए बैडमिन्टन एकेडमी में एकेडमी के सदस्यों के पारिवारिक शादी-ब्याह आयोजित करने की अनुमति दे दी।
एकेडमी के सदस्यों में कद्दावर नेता, ब्यूरोक्रेट व व्यापारी शामिल हैं। परन्तु इस अवैध अनुमति के नाम पर एकेडमी ने अब तक करोडों रूपये कमा लिए हैं।
उक्त जनहित याचिका जेके चैरिटेबुल ट्रस्ट के ट्रस्टी व अधिवक्ता उच्च न्यायालय एवं पूर्व अध्यक्ष जूनियर बार एसोसिएशन प्रतापगढ़ विनोद कुमार पाण्डे ने दाखिल की है। विनोद पाण्डे ने बताया कि एकेडमी का गठन प्रदेश में खेलां के विकास के लिया किया गया था, लेकिन इस तथाकथित विकास के नाम पर बैडमिन्टन एकेडमी के कर्ता-धर्ताओं ने अपना विकास जरूर कर लिया। विनोद पान्डे का कहना है वर्तमान में खेल निदेशक व लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी खुले आम जनता के पैसे का दुरूपयोग करके अपनी जेब भरने में लगे हैं, जब सभी जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई कार्यवाही नहीं की तो मजबूरन उन्हें न्यायालय की शरण में आना पड़ा है।
विनोद पाण्डे ने मांग की है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा बैडमिन्टन एकेडमी को की गई लीज, तत्काल निरस्त कराने की कार्यवाही करनी चाहिए। साथ ही अब तक की गई करोडों की अवैध कमाई की रिकवरी भी बैडमिन्टन एकेडमी के कर्ता-धर्ता से की जानी चाहिए।
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