मंत्री की मर्जी के बगैर कोई आवेदन रद्द नहीं होगा : केजरीवाल


दिल्ली सरकार के मुताबिक रिश्वत लेने के लिए आवेदन में गड़बड़ी का बहाना कर कई मामलों को निचले स्तर पर खारिज किया जा सकता है। सरकार ने एक बयान में कहा, अगर योजना के तहत किसी भी आवेदन/अनुरोध को लेकर देरी की जाती है तो इसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए इस जनसमर्थक योजना को नुकसान पहुंचाने की कोशिश के रूप में लिया जाएगा। इस सेवा के लिएदिल्ली सरकार ने मंगलवार को नई लाइन बढ़ाईं और पहले दिन सामने आई खामियों को दूर करने की कोशिश की। इस सेवा की सीधी निगरानी मुख्यमंत्री कर रहे हैं।

 

बुधवार को लाइन और ऑपरेटर की संख्या और बढ़ाई जाएंगी। पहले दिन के कामकाज के बाद मुख्यमंत्री ने मंगलवार को इन सेवा के के कामकाज की समीक्षा की और कैबिनेट के सभी मंत्रियों को इस योजना को लागू करने के लिए सख्त निर्देश भी जारी किए। उन्होंने निर्देश दिया है कि मोबाइल सहायक की तरफ से किसी भी विभाग में सबमिट किए गएआवेदन में से कोई भी मामला संबंधित मंत्री की मंजूरी के बिना रद्द नहीं किया जा सकेगा। ऐसे मामलों पर 24 घंटे में फैसला लेना होगा।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि समय सीमा संबंधी कोई भी उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि कुछ भ्रष्ट अधिकारी आवेदनों को जानबूझकर लटकाते हैं, जिससे कि काम में देरी हो और आवेदन करने वाले लोग रिश्वत देने को बाध्य हों। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार के मामलों में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उल्लंघन को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

जीबी पंत अस्पताल में खराब सर्जिकल दस्तानों के साथ सीरिंज की आपूर्ति को लेकर सरकार सख्त हो गई है। अस्पताल कर्मियों के प्रदर्शन के बाद हुई जांच की प्राथमिक रिपोर्ट में यह सही पाए जाने पर मुख्यमंत्री अऱविंद केजरीवाल ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है। दस दिनों में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।

मुख्यमंत्री ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक का जिक्र करते हुए कहा है कि अस्पताल में खराब दस्तानों की आपूर्ति हो रही है। यह लापरवाही ना सिर्फ वहां काम करने वाले लोग बल्कि वहां आने वाले मरीजों के लिए भी खतरनाक है। इस तरह के सामानों की आपूर्ति कर आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वह भी तब जबकि दिल्ली सरकार की कोशिश है कि आम लोगों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जाएं।


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