
lucknow | उ0प्र0 के उच्च शिक्षा विभाग ने नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए आदेश जारी कर दिया है सभी महाविद्यालयों में नकल विहीन परीक्षा हो इसके लिए सीटीबीटी डबल कैमरा लगाने के साथ साथ वाइस रिकार्डर भी लगाने के दिशा निर्देश जारी है ।बहुत बड़ा सवाल उन महाविद्यालयों के लिए है जो स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत संचालित है जिनकी परीक्षा हमेशा परम्परा गलत तरीके से चलती रही है क्योंकि उनके महाविद्यालयों में शिक्षक और प्राचार्य अनुमोदन कराकर एक मुस्त धनराशि लेकर गायब है उनकी जगह केवल खाना पूर्ति के लिए नकली प्राचार्य और नकली शिक्षक महाविद्यालयों में अपनी उपस्थिति बनाय हुए है ।स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में अधिकांश महाविद्यालयों ने प्रवेश भी ठेके पर ले रखे है आज ठेके के महाविद्यालयों के सामने चुनौती है नकल विहीन परीक्षा क्योंकि अधिकांश छात्रों ने प्रवेश भी इसी शर्त पर लिया है महाविद्यालय नही आएँगे और परीक्षा ही देना है ,लेकिन नकल विहीन परीक्षा के लिए कटिबद्ध उ0प्र0 सरकार के लिए यह महाविद्यालय जो ठेका लेकर पास कराने का कार्य करते थे एक चुनौती बने हुए है ।
इन महाविद्यालयों में बड़े स्तर पर शिक्षक /प्राचार्य अनुमोदन घोटाला है ।शिक्षक और प्राचार्य केवल विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के अभिलेखो में हैं ।वर्तमान समय में उ0प्र0 सरकार के आगे सबसे बड़ी चुनौती यह है कि स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में केन्द्रा अध्यक्ष और कक्ष निरीक्षक की व्यवस्था कैसे होगी उ0प्र0 सरकार के पास स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के शिक्षकों का कोई आकड़ नही है उ0प्र0 के राज्य विश्वविद्यालयों ने अभी भी स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के शिक्षकों और प्राचार्यो का विवरण ऑनलाइन नही किया है ।परीक्षा के समय शिक्षक और प्राचार्य कहाँ से आते है इन स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कौन बनता है कक्ष निरीक्षक कौन बनता है केन्द्रा अध्यक्ष इसकी जाँच पड़ताल बहुत जरूरी है उ0प्र0 की राजधानी लखनऊ समेत उ0प्र0 के सभी जनपदो में शिक्षक /प्राचार्य अनुमोदन घोटाला है जिसकी जाँच होनी चाहिए अगर महाविद्यालयों में नही है शिक्षक तो इन छात्र -छात्राओं को पढ़ाया किसने कक्षाए चली नही तो परीक्षा किसकी अगर महाविद्यालयों में शिक्षक हैं तो उनका डाटा बेस क्यों नही? क्या उ0प्र0 के राज्य विश्वविद्यालय यह बता पाने में सक्षम है कि उनके विश्वविद्यालय से सम्बद्ध स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कितने प्राचार्य अनुमोदित और कार्य रत है और एक प्राचार्य केवल एक विश्वविद्यालय और एक ही महाविद्यालय में है ।
अनुमोदन घोटाले की जाँच होने से ही हकीकत सबके सामने आयगी ।एक शिक्षक एक से अधिक महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अनुमोदन करा कर गायब है जिसका खामियाजा वह लोग झेल रहे हैं जो ईमानदारी से कार्य करने के इच्छुक है ।बहुत बड़े भ्रष्टाचार के दौर से गुजरी है उ0प्र0 की स्ववित्तपोषित उच्च शिक्षा आज इसके सुधार के लिए पहल की आवश्यकता है ।उ0प्र0 सरकार नकल विहीन परीक्षा संपन्न कराने के साथ ही अनुमोदन घोटाले को खत्म करने की भी पहल करे सरकार द्वारा शिक्षकों का विवरण ऑनलाइन कर केंद्रीय कृत डाटा बेस तैयार कर सरकारी पोर्टल पर सभी का विवरण ऑनलाइन उपलब्ध हो एक शिक्षक एक अनुमोदन के बाद शिक्षक अनुमोदन घोटाला खत्म हो इसके लिए सकारात्मक पहल की आवश्यकता है ।
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