
सीतारमण ने कहा कि देश पर भरोसा करें, जैसे आप 100 साल से करते रहे हैं। बल्कि अब ज्यादा भरोसा दिखाने की जरूरत है। डेवलपमेंट और ग्रोथ हमारी प्राथमिकताएं हैं, सरकार सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है।
सीतारमण ने भारतीय उद्योग जगत से देश की आर्थिक वृद्धि में भागीदार बनाने का आह्वान करते हुये कहा कि उन्हें सरकार के विनिवेश कार्यक्रम में पहली बोली लगाकर अपना योगदान करना चाहिये।उन्होंने कहा, ‘‘यह सरकार नहीं चाहती है कि व्यावसाय बंद हों।हम विधायी और अन्य प्रशासनिक बदलावों के जरिये फिर से खड़ा होने में उनकी मदद करना चाहते हैं .. हम आपके साथ हैं। मैं चाहती हैं कि आपका यह खुद के संदेह की यह सोच पूरी तरह से आपके दिमाग से निकल जानी चाहिये।’’ वित्त मंत्री ने विकास और वृद्धि पर जोर देते हुये कहा कि ये दोनों सरकार की प्राथमिकतायें हैं और सरकार सुधारों को बढ़ाने के लिये प्रतिबद्ध है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी डाली गई और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां) क्षेत्र में भी नकदी बढ़ाने के उपाय किये गये साथ ही सार्वजनिक उपक्रमों के निदेशक मंडलों को पेशेवर बनाने के प्रयास भी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कर प्राप्ति में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है और कर अधिकारी व करदाता के आमने सामने आने की पुरानी व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया है ताकि भ्रष्टाचार समाप्त किया जा सके।
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