राज्यसभा में लोकपाल बिल हुआ पास, पर अन्ना ने नहीं तोड़ा अनशन


मुंबई। राज्यसभा में लोकपाल विधेयक पारित होने के बाद भी अन्ना हजारे ने अपना अनशन नहीं तोड़ा। वे अपना अनशन तभी तोड़ेंगे जब लोकपाल बिल लोकसभा में पारित हो जाएगा। राज्यसभा में विधेयक पारित होने पर खुशी जाहिर करते हुए समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा है किवह बुधवार को लोकसभा में यह विधेयक पारित होने के बाद अपना अनशन समाप्त कर देंगे। मंगलवार को उनकेअनशन का आठवां दिन था।
राज्यसभा में मंगलवार शाम लोकपाल विधेयक पारित होते ही अन्ना के गांव रालेगणसिद्धि में जश्न का माहौल बन गया। राज्यसभा की सीधी कार्यवाही देखने के लिए आज अन्ना के अनशनस्थल पर ही टेलीविजन सेट लगाए गए थे। विधेयक पारित होते ही अपने साथ मंच पर मौजूद किरण बेदी एवं पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वी.के.सिंह के साथ तिरंगा लहराकर अन्ना ने प्रसन्नता व्यक्त की। भारत माता की जय एवं वंदे मातरम् के नारों से पूरा रालेगणसिद्धि गूंज उठा। ग्रामवासियों ने पटाखे फोड़कर खुशी का इजहार किया। इस अवसर पर अन्ना ने उपस्थित लोगों के संबोधित करते हुए कहा कि मैं विधेयक का विरोध करनेवाली समाजवादी पार्टी को छोड़कर राज्यसभा में विधेयक का समर्थन करनेवाले सभी सांसदों का आभारी हूं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बुधवार को लोकसभा में भी सभी दलों के सदस्य इस विधेयक को पारित कराने में मदद करेंगे।
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अन्ना ने कहा कि देश की आवाज सुनकर आज समाजवादी पार्टी को छोड़कर अन्य सभी दलों ने राज्यसभा में यह विधेयक पारित कराया है। विधेयक पारित करानेवाले सभी सदस्यों को जनता की तरफ से धन्यवाद देते हुए अन्ना ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में बैठे हुए लोगों को यह लगने लगा है कि देश की जनता भ्रष्टाचार केविरोध में एक सशक्त कानून चाहती है। अन्ना ने उम्मीद जताई कि यह कानून अमल में आने के बाद भले ही भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म न हो, लेकिन उसमें 40 से 50 फीसद तक कमी जरूर आएगी। अन्ना का मानना है कि प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के लोकपाल केदायरे में एवं उसके नीचे के अधिकारियों के सीवीसी के दायरे में आने के बाद अधिकारी भ्रष्टाचार करते हुए डरेंगे।
गौरतलब है कि अन्ना हजारे देश में जनलोकपाल व्यवस्था लागू कराने के लिए सन् 2010 से ही आंदोलन कर रहे हैं। पहले उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर अनशन किया। फिर अगस्त, 2011 में दिल्ली के ही रामलीला मैदान में उनका लंबा अनशन चला। तब सरकार ने लोकपाल विधेयक पारित कराने का आश्वासन देकर उनका अनशन तुड़वाया था। लेकिन उसके बाद भी लोकपाल विधेयक राज्यसभा पारित होने में करीब डेढ़ साल का समय लग गया है।


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