कोलकाता। एक मंच, जिस पर वो ‘क्रिकेट का भगवान’ मौजूद था जिसकी झलक पाने के लिए और उनसे प्रेरित होने वालों की कमी नहीं है। उसी मंच पर एक ट्रॉफी भी मौजूद थी, जिसकी झलक पाने और उसे छूने के लिए खेल जगत के करोड़ों दीवाने और दुनिया के तमाम फुटबॉलर बस मौका तलाशते रह जाते हैं। ये ट्रॉफी थी फीफा फुटबॉल विश्व कप की स्वर्ण ट्रॉफी…लेकिन इसे सचिन बस देख ही सके, छू नहीं पाए…
मास्टर ब्लास्टर तेंदुलकर जब फीफा विश्व कप ट्रॉफी के विश्व टूर पर उसके भारत आगमन समारोह में पहुंचे तो इस ऐतिहासिक ट्रॉफी को बस देखते रह गए। उनके आंखों की चमक और चेहरे की ललक साफ दिखा रही थी कि वो इस ट्रॉफी को एक बार हाथ में लेने की ख्वाइश रखते थे, लेकिन ये मुमकिन नहीं हो सका क्योंकि फीफा के सख्त नियमों के मुताबिक इस ट्रॉफी को सिर्फ दो ही लोग छू सकते हैं, एक फुटबॉल विश्व कप विजेता टीम का कप्तान और दूसरा किसी राज्य का प्रमुख। इसी नियम की वजह से ये शानदार ट्रॉफी सचिन के करीब तो रखी रही लेकिन उन्हें खेल जगत में उनकी भव्य पहचान के बावजूद इस ट्रॉफी को छूने नहीं दिया गया। सचिन ने मौके पर अपनी भावनाओं को भी सामने रखा और कहा कि वो विश्व कप ट्रॉफी की अहमियत को बखूबी जानते हैं क्योंकि उन्होंने खुद क्रिकेट विश्व कप को छूने के लिए 22 साल इंतजार किया और 2011 में 28 साल बाद भारत ने जब फिर से विश्व कप क्रिकेट जीता, तब ही उनकी वो मुराद पूरी हो सकी।
इस मंच पर पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली भी मौजूद रहे लेकिन वो भी इस एतिहासिक ट्रॉफी को छू ना पाए। पूर्व ब्राजिलियन फुटबॉलर और 2014 विश्व के आधिकारिक ब्रान्ड एम्बैसेडर कार्लोस एलबर्टो टोरेस ने ही वहां मौजूद लोगों को इस ट्रॉफी को उठाकर करीब से रूबरू कराया।
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