मकर संक्रान्ति- दान का महापर्व


मकर सक्रांति पर जहां दान का महापर्व तो है ही साथ ही यह पर्व मानव जीवन में उत्साह के संचार का भी पर्व है। मंगलवार को दान के साथ मकर संक्रान्ति का पर्व मनाया जाएगा।
आज दिवाकर हो जाएगें उलरायण
पं.महेश चंद वशिष्ठ बताते हैं कि सूर्य देवता छह माह तक दक्षिणायन रहने के बाद मकर सक्रांति के दिन उलरायण होते हैं। इसी दिन से ऋतु में भी परिवर्तन होने लगता है। उनके मुताबिक पौष माह में मानव शरीर कई बीमारियों के संपर्क में आ जाता है। लेकिन सूरज के उलरायण होने के बाद सूर्य की किरणें शरीर पर औषधि का कार्य करती है।
पतंग उड़ाना भी है खास रिवाज
मकर सक्रांति के पर्व पर कई जगह पतंग उड़ाए जाने का भी रिवाज है । पंडित दुलीदत्त कौशिक बताते हैं कि पतंग सदैव व्यक्ति को सकारात्मक रूप देने की कोशिश करती है और व्यक्ति को अपने लक्ष्य पर रखने के साथ ऊचाईयों को छूने का भी संदेश देती है। मनोरंजन के साथ यह नैतिक शिक्षा और परिस्थितियों से जूझने की हिम्मत भी देती है। उनके मुताबिक इस पर्व के मद्देनजर उड़ाई जाने वाली पतंग जीवन में ऊंचाईयों को छूने के साथ संतुलन बनाने के लिए भी प्रेरित करती है।
सेहत के लिए भी लाभकारी
सक्रांति पर तिल, चावल और गुड़ का दान तो है ही साथ ही यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। आयुर्वेदाचार्य राहुल चतुर्वेदी बताते हैं कि ठंड के मौसम में शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस दौरान खाया जाने वाला तिल शरीर में तेल की कमी को पूरा करता है, जबकि गुड़ की तासीर गर्म होती है जो कि शरीर को गर्मी प्रदान करता है। इसलिए इस पर्व में तिल और गुड़ से बने व्यंजन खासतौर से बनाए जाते हैं।


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