प्रदेश के विकास को गति देने के लिये जैव-प्रौद्योगिकी नीति: डाॅ0 मनोज कुमार पाण्डेय


unnamedलखनऊ: उत्तर प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डाॅ0 मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री  की दूरदृष्टि एवं गहन चिन्तन का ही परिणाम है कि प्रदेश के विकास को गति देने के लिये जैव-प्रौद्योगिकी नीति बनायी गयी है। उन्होंने कहा कि नीति का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से सुनिश्चित कराकर प्रदेश के विकास की गति में तेजी लायी जाये। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त वैज्ञानिकों के पूर्व अनुभवों को दृष्टिगत रखते हुये उनके ज्ञान एवं अनुभव का उपयोग प्रदेश के हित में किये जाने हेतु गंभीरता से विचार किया जाना होगा।
मुख्य सचिव श्री आलोक रंजन ने कहा कि प्रदेश के विकास हेतु कृषि उत्पादन को बढ़ाया जाना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में टिशू कल्चर लैब की स्थापना हेतु डिमाण्ड को दृष्टिगत रखते हुये और अधिक लैब खोलने हेतु गंभीरता से विचार किया जाये। उन्होंने कहा कि ट्रांस गंगा सिटी परियोजना में बायोटेक्नोलाॅजी इण्डस्ट्री के विकास हेतु पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराने हेतु गंभीरता से विचार किया जाये। उन्होंने कहा कि परियोजना में क्लीन एवं ग्रीन इण्डस्ट्री को बढ़ावा दिया जाये। उन्होंने कहा कि बायोटेक्नोलाॅजी को बढ़ावा देने हेतु निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार कार्य योजना बनाकर क्रियान्वित कराने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के अन्य प्रदेशों से बायोटेक्नोलाॅजी में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक हमारे प्रदेश की संपदा हैं और उन्होंने कहा कि मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि वर्तमान में लगभग 03 हजार वैज्ञानिक प्रदेश के विकास हेतु निरन्तर कार्य कर रहे हैं।
मुख्य सचिव आज क्लार्क अवध में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित बायोटेक्नोलाजी-बिजनेस अपार्चुनिटीज इन यू0पी0 कार्यशाला का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलित करने के उपरान्त अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में टिशू कल्चर से केले की खेती को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास के लिये बायोटेक्नोलाजी इण्डस्ट्री को डेवलप करने हेतु नियमानुसार हर संभव मदद की जायेगी। उन्होंने कहा कि आवश्यकता है कि जैव-प्रौद्योगिकी नीति का क्रियान्वयन और तेजी से कराकर पात्र लोगों को अधिक से अधिक लाभान्वित कराकर उन्हें जोड़ा जाये। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को प्रत्येक माह में एक बार अवश्य एक साथ बैठकर आपस में विचार-विमर्श कर जैव-प्रौद्योगिकी नीति के क्रियान्वयन में तेजी लाने में अपनी भागीदारी और अधिक सुनिश्चित करनी होगी।
सेमिनार में प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी डाॅ0 हरशरण दास, कुलपति के0जी0एम0यू0 डाॅ0 रविकान्त सहित अन्य वैज्ञानिकों ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

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