नई दिल्ली: भारत और श्रीलंका के विकास की एक दूसरे के विकास पर निर्भरता रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज श्रीलंका को रेलवे, ऊर्जा, कृषि, क्षमता निर्माण, विज्ञान एवं तकनीकी अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा आदि क्षेत्रों में भारत की ओर से सहयोग की प्रतिबद्धता आज व्यक्त की। मोदी ने यहां हैदराबाद हाउस में श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के साथ शिखर बैठक के बाद अपने मीडिया वक्तव्य में यह बात कही।
विक्रमसिंघे देश के संसदीय चुनावों के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर कल नई दिल्ली पहुंचे। उनके साथ श्रीलंका के विदेश मंत्री मंगला समरवीरा तथा विकास रणनीति एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मालिक समरविक्रम भी आए हैं। दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष एवं चिकित्सा क्षेत्र में चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए जिनमें श्रीलंका के गृहयुद्ध प्रभावित वावुनिया में 200 बिस्तर वाले अस्पताल की स्थापना के लिए उपकरणों की आपूर्ति और श्रीलंका में एयर एम्बुलैंस सेवा आरंभ करने के करार शामिल हैं।
मोदी ने इस वर्ष दोनों देशों के संबंधों में हुई प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देश आर्थिक संबंधां को मजबूत करना चाहते हैं। भारत आपसी व्यापार को श्रीलंका के पक्ष में संतुलित करने के हक में है। इसके लिए अधिक खुले एवं प्रतिस्पर्धी बाजार के लक्ष्य को हासिल करने के उपायों पर बातचीत हुई है। प्रधानमंत्री ने विक्रमसिंघे को आश्वासन दिया कि भारत श्रीलंका के ढांचागत विकास, रेलवे, ऊर्जा, सामुदायिक विकास परियोजनाओं कृषि, क्षमता निर्माण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष एवं असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में लगातार सहयोग देता रहेगा।
विक्रमसिंघे ने भी कहा क भारत एवं श्रीलंका के बीच व्यापारिक संबंध 2500 वर्ष पुराने हैं। उन्होंने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग समझौते पर बातचीत में हुई प्रगति पर संतोष जताया और कहा कि अगले वर्ष इस पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। श्रीलंकाई प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश पयर्टन को बढ़ावा देने के लिए भी उत्सुक हैं। इसके बाद विक्रमसिंघे की ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, रेल मंत्री सुरेश प्रभु, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से मुलाकात होगी।
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