अंतरिक्ष में भारत की बड़ी कामयाबी, श्रीहरिकोटा से PSLV-C30 लांच


 

2015_9image_14_33_402892026speciala-bश्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज कामयाबी के एक और मील का पत्थर स्थापित करते हुए देश के पहले ‘एस्ट्रोसैट’ उपग्रह पीएसएलवी-सी30 का प्रक्षेपण कर इतिहास रच दिया। यह भारत का पहला एस्ट्रोसैट उपग्रह है और इससे ब्रहांड को समझने और सुदूरवर्ती खगोलीय पिंडों के अध्ययन करने में में मदद मिलेगी। 513 किलोग्राम का एस्ट्रोसैट उपग्रह को 6 अन्य विदेशी उपग्रहों के साथ प्रक्षेपित किया गया।

इसरों की कामयाबी का एक और मील का पत्थर
इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और इसके अध्यक्ष ए.एस किरण कुमार की निगरानी में इस ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) को श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया। प्रक्षेपण के बाद इन सातों उपग्रहों को सफलता पूर्वक अपनी कक्षा में स्थापित कर दिया गया। ‘एस्ट्रोसैट’ खगोलीय पिंडों के अध्ययन करने वाला भारत का पहला उपग्रह है। इस उपग्रह के सफलता पूर्वक लॉन्च के साथ इसरों ने कामयाबी का एक और मील का पत्थर स्थापित किया।

पहली बार अमेरिका ले रहा मदद
इसरो चेयरमैन ए. एस. किरन कुमार के मुताबिक, भारत 19 देशों के 45 सैटेलाइट्स लांच कर चुका है और ये पहली बार है कि अमेरिका किसी सैटेलाइट लाचिंग के लिए भारत की मदद ली है। अमेरिका 20वां देश है, जो कमर्शियल लांच के लिए इसरो से जुड़ा है। भारत से पहले अमेरिका, रूस और जापान ने ही स्पेस ऑब्जर्वेटरी लांच किया है।

क्या है एस्ट्रोसैट?
इसरो के मुताबिक, इस मिशन का मकसद स्पेस से सैटेलाइट के जरिए धरती पर होने वाले बदलावों का साइंटिफिक एनालिसिस करना है। एस्ट्रोसैट के जरिए अल्ट्रावायलेट रे, एक्स-रे, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम जैसी चीजों को यूनिवर्स से परखा जाएगा। इसके साथ ही, मल्टी-वेवलेंथ ऑब्जर्वेटरी के जरिए तारों के बीच दूरी का भी पता लगाया जाएगा। इससे सुपर मैसिव ब्लैक होल की मौजूदगी के बारे में भी पता लगाने में मदद मिल सकती है।

20 सितंबर 1993 को पीएसएलवी ने भरी थी पहली उड़ान
ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) की पहली उड़ान 20 सितंबर 1993 को भरी थी लेकिन उसकी असफला के बाद पीएसएलवी की सभी उड़ान कामयाब रही है। पीएसएलवी-सी30 के सफल प्रक्षेपण के बाद इस यान की 31 में से 30 उड़ान सफल रहे है जिससे एक ही मिशन में कई उपग्रहों के लॉन्च के साथ उनके कक्षा में स्थापित करने में कामयाब रहा है।   एक साधारण शुरुआत के बाद, पीएसएलवी मिशन ने 2008 में तीन सफल प्रक्षेपण के साथ गति पकड़ा। उसके बाद 2011, 2013 और 2014 में तीन तीन अंतरिक्ष मिशन को कामयाबी से पूरा किया। इस वर्ष का यह तीसरा अभियान है।


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