फार्मा सेक्टर के प्रोत्साहन हेतु विशेष प्राविधान पर विचार कर रही सरकार—प्रमुख सचिव महेश कुमार गुप्ता


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लखनऊ| राज्य में बेहतर होते हुए औद्योगिक वातावरण का लाभ उठाते हुए राज्य सरकार अब फार्मासियुटिकल सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए विषेष रूप से विचार कर रही है। इसके लिए नई क्षेत्र-विशेष फार्मा नीति अथवा प्रोत्साहन व सुविधा पैकेज बनाया जा सकता है।

इस सम्बन्ध में प्रमुख सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास –  महेश कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। इसमें उद्योग बन्धु की संयुक्त अधिशासी निदेषक – श्रीमती कंचन वर्मा सहित उद्योग बन्धु, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के अधिकारियों ने भाग लिया।

प्रमुख सचिव एवं उद्योग बन्धु के अधिशासी निदेषक,  महेश कुमार गुप्ता ने कहा- ”राज्य सरकार द्वारा उठाये गए विभिन्न कदमों के फलस्वरूप प्रदेश के औद्योगिक वातावरण में उल्लेखनीय सुधार आया है तथा ब्राण्ड यू.पी. में निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। अतः उत्तर प्रदेश में क्षेत्र-विशेष मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार फार्मा उद्योग के प्रोत्साहन हेतु विशेष प्राविधान करने पर विचार कर रही है, इसके लिए विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श शुरू कर दिया गया है।“

संयुक्त अधिशासी निदेषक, उद्योग बन्धु-श्रीमती कंचन वर्मा ने बताया कि इसके अन्तर्गत अन्य प्राविधानों के अलावा, उत्तम मैन्यूफैक्चरिंग प्रणाली, तकनीक का उच्चीकरण, लाॅजिस्टिक्स एवं परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना पर विषेष बल दिया जाएगा।

सहायक आयुक्त, औषधि प्रषासन – श्री ए के मल्होत्रा ने बताया कि प्रदेश में लगभग 450 फार्मासियूटिकल इकाइयाँ हैं, जिनमें से अधिकतर राज्य के पष्चिमी भाग- गाजियाबाद एवं गौतमबुद्ध नगर में स्थित हैं, जबकि लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, अलीगढ़ व गोरखपुर आदि में भी कुछ इकाइयाँ हैं।

यू.पी. ड्रग्स मैन्यूफक्चरर्स एसोसिएषन के अनुसार, फार्मा सेक्टर के रु 90,000 करोड़ के कुल राष्ट्रीय विक्रय टर्नओवर में 17 प्रतिशत् हिस्सा उत्तर प्रदेश का है। इसलिए राज्य सरकार के सहयोग से प्रदेश में ड्रग सेक्टर को प्रोत्साहन की आवष्यकता है।

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में ही अनेक क्षेत्र-विशेष नीतियों की घोषणा की है, जिसमें अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति के अलावा सौर ऊर्जा, चीनी उद्योग, सूचना प्रोद्यौगिकी, इलेक्ट्राॅनिक मैन्यूफक्चरिंग, पोल्ट्री प्रोत्साहन, खाद्य-प्रसंस्करण आदि नीतियाँ शामिल हैं।

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