सभी विभागों को उद्यमियों की समस्याओं का नीतियों व नियमों के अनुसार निश्चित समय-सीमा में निस्तारण कर उनके द्वारा की गई कार्यवाही की जिम्मेदारी लेनी होगी– – श्री आलोक टण्डन, आई.आई.डी.सी


उद्योगों की समस्याओं के निराकरण हेतु अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त ने उद्यमियों से वेबिनार के माध्यम से संवाद किया  

  • प्रदेश में अब मण्डी के बाहर ट्रेड एरिया के सापेक्ष मण्डी शुल्क देय नहीं होगा; मण्डी समितियों का कार्यक्षेत्र निर्मित मण्डी परिसरों तक हुआ सीमित
  • भूखण्डों के संविलयन (Amalgamation) के प्रकरणों में जमा प्रोसंेसिंग शुल्क को प्रतिफल मानते हुए स्टाम्प ड्यूटी देय होगी; यदि संविलयन निःशुल्क हुआ हो, तो पूरक पत्र में रु.100 की स्टाम्प ड्यूटी देनी होगी
  • औद्योगिक इकाइयों के मासिक विद्युत बिलों में केडब्ल्यूएच (KWH)तथा केडब्ल्यूए (KWA)के कारण अधिक बिल आने का शीघ्र किया जाएगा तकनीकी समाधान
  • कुल 17 प्रकरणों के समयबद्ध व त्वरित निस्तारण हेतु हुए निर्देश

लखनऊ |   उत्तर प्रदेश के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आई.आई.डी.सी.) एवं उद्योग बन्धु के अध्यक्ष, श्री आलोक टण्डन की अध्यक्षता में उद्योग बन्धु की उच्च-स्तरीय मासिक बैठक का आयोजन आज यहाँ योजना भवन में किया गया।
उत्तर प्रदेश में विद्यमान उद्योगों से संबंधित समस्याओं व प्रकरणों के त्वरित निस्तारण व नियमित अनुश्रवण हेतु इस बैठक में एवं प्रमुख सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, श्री आलोक कुमार तथा सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास व अधिशासी निदेशक, उद्योग बन्धु- श्रीमती नीना शर्मा की उपस्थिति में लगभग 20 उद्योगपतियों व औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने वेबिनार के माध्यम से भाग लिया तथा 17 प्रकरणों पर विचार-विमर्श कर निस्तारण किया गया। समस्त प्रकरणों के समयबद्ध व त्वरित निस्तारण हेतु निर्देश दिए गए।

मे. राइस मिलर्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, गाजियाबाद के प्रदेश में धान आयात कर चावल निर्यात करने पर मण्डी शुल्क से छूट न मिल पाने के प्रकरण सहित तीन मामलों का समाधान करते हुए सूचित किया गया कि राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना एवं भारत सरकार द्वारा कृषि विपणन सुधारों के फलस्वरूप अब मण्डी परिसर के बाहर ट्रेड एरिया में मण्डी शुल्क देय नहीं होगा। मण्डी समितियों का कार्यक्षेत्र निर्मित मण्डी परिसरों तक सीमित हो गया है।

भूखण्डों के संविलयन (Amalgamation) पर पुनः स्टाम्प ड्यूटी जमा करने की समस्या का समाधान करते हुए एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के अन्तर्गत् सूचित किया गया कि भूखण्डों के संविलयन के प्रकरणों में जमा किए गए अतिरिक्त प्रोसंेसिंग शुल्क को प्रतिफल मानते हुए उस पर स्टाम्प ड्यूटी देय होगी। यदि संविलयन निःशुल्क हुआ होगा, तो पूरक पत्र में रु.100 की स्टाम्प ड्यूटी देनी होगी।

औद्योगिक आस्थान, हाथरस में KWH तथा KWA आधारित मासिक विद्युत बिलों के अधिक आने के प्रकरण पर आई.आई.डी.सी. ने उ. प्र. पावर काॅर्पोरेशन को निर्देशित किया कि बिलिंग साॅफ्टवेयर में आवश्यक प्राविधान कर प्रदेश के उद्योगों की इस समस्या का तकनीकी समाधान एक माह में किया जाए।

इससे पूर्व आई.आई.डी.सी. ने वीडियो लिंक के माध्यम से उद्यमियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि औद्यागिक विकास राज्य सरकार की उच्चतम् प्राथमिकताओं में सम्मिलित है, अतः माननीय मुख्यमंत्री जी के स्पष्ट निर्देशों के अनुपालन में उद्योगों की समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध रूप से करने के उद्देश्य से उद्योग बन्धु की उच्च-स्तरीय बैठक प्रत्येक माह आयोजित की जाती हंै, किन्तु कोविड महामारी के कारण अप्रैल व मई में बैठक नहीं हो पाई।
श्री टण्डन ने कहा कि सभी विभागों द्वारा उद्यमियों की समस्याओं का नीतियों व नियमों के अनुसार निश्चित समय-सीमा में निस्तारण कर उनके द्वारा की गई कार्यवाही की जिम्मेदारी लेनी होगी।

प्रमुख सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, श्री आलोक कुमार ने उद्यमियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उद्योगों की सुविधा हेतु प्रक्रियाओं का निरन्तर सरलीकरण कर रही है। उन्होंने समस्त सम्बंधित विभागों को निर्देशित किया कि परस्पर समन्वय स्थापित कर उद्यमियों की समस्याओं का समयबद्ध निवारण सुनिश्चित किया जाए।

आज की बैठक में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, राजस्व विभाग, आवास विभाग, नगर विकास विभाग, कृषि विपणन विभाग, एमएसएमई विभाग, ऊर्जा विभाग, उ. प्र. राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा), पिकप एवं स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग से सम्बन्धित प्रकरणों के समाधान हेतु विचार किया गया।
उद्यमियों तथा औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के अतिरिक्त, विशेष सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास एवं प्रबन्ध निदेशक, पिकप-सुश्री सुजाता शर्मा सहित 8 सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में प्रतिभाग किया।
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