
लखनऊ। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अतुल वत्स द्वारा आज प्राधिकरण सभागार में पूर्व निर्धारित समय सारणी के अनुसार विधि अनुभाग के कार्य-कलापों से सम्बन्धित मुख्य बिन्दुओं पर समीक्षा बैठक की गई:-
- जनपद-न्यायालय स्तर पर लम्बित सीलिंग वादों की समीक्षा
- मा0 उच्च न्यायालय में लम्बित वादों की समीक्षा
- मा0 उच्चतम न्यायालय में लम्बित वादों की समीक्षा
- उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) में लम्बित वादों की समीक्षा
- प्राधिकरण स्तर पर वादों के कम्प्यूटर फीडिंग कार्य की समीक्षा
- मा0 एस0सी0/एस0टी0, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग आदि एवं अन्य मा0 आयोग में लम्बित वादों की समीक्षा
निर्देशित किया गया कि सभी न्यायालयों से सम्बन्धित विचाराधीन समस्त वादों की प्रभावी पैरवी अधिवक्ताओं के माध्यम से की जाये। समीक्षा में यह पाया गया कि वादों की नियमित समीक्षा हेतु एक पोर्टल बनाया गया था, परंतु उसका उपयोग न होने के कारण वह अप्रचलित हो गया था। इसमें डाटा फीड कर अद्यतन करने के निर्देश दिये गये। प्राधिकरण अधिवक्ता से यह अपेक्षा की जाएगी कि यदि किसी मुक़दमे में प्राधिकरण के विपरीत आदेश हुआ है तो अग्रिम कार्यवाही हेतु स्पष्ट विधिक परामर्श उपलब्ध कराया जायेगा। प्रभावी पैरवी एवं समीक्षा के अभाव में प्राधिकरण के वादों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। - अतः यह आवश्यक है कि प्राधिकरण से सम्बन्धित महत्वपूर्ण वादों को ससमय पटल प्रभारियों से समन्वय स्थापित करते हुए उच्चाधिकारियों को भी व्यक्तिगत रूप से सूचित करते हुए प्राथममिकता के आधार पर निस्तारित किया जाये। भविष्य में सहायक प्रभारी विधि का यह दायित्व होगा कि वह अपने न्यायालय से संबंधित अधिवक्ता से एक सप्ताह पूर्व केस के तथ्यों पर चर्चा कर अधिवक्ता को अवगत करा दें, तथा नयी दायर याचिकाओं की maintainability पर भी उन्हें challenge करे। इसके अतिरिक्त सभी स्थानीय न्यायालयों में विचाराधीन समस्त वादों का डेटा प्राधिकरण के पैरोकार व लिपिक द्वारा अद्यतन किए जाने हेतु निर्देशित किया गया।
- उक्त बैठक में सचिव, गा0वि0प्रा0, गाजि0, विशेष कार्याधिकारी-प्रथम, विशेष कार्याधिकारी-द्वितीय, वित्त नियंत्रक, सहायक प्रभारी विधि व विधि अनुभाग का समस्त स्टॉफ उपस्थित रहा।
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