
लखनऊ। अगस्त 2014 में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यभार संभालने के बाद अमित शाह ने न केवल पार्टी संगठन को मजबूत किया बल्कि उनके इस अल्पकार्यकाल में पार्टी दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में भी उभर कर आई। यह देश में पार्टी की एकदम नई पहचान थी जिसने पूरे देश में भाजपा का परचम लहरा दिया। यह श्री शाह के अथक प्रयासों और कुशल नेतृत्व का ही नतीजा है कि पार्टी के सदस्यता अभियान से सदस्यों की संख्या महज ढाई करोड़ से बढ़कर ग्यारह करोड़ से भी अधिक हो गई। पार्टी संगठन को मजबूत करने के साथ साथ श्री शाह के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने देश के राजनीतिक पटल पर भी पार्टी को नई पहचान दी।
श्री शाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद बीते 18 महीने में भारतीय जनता पार्टी ने छह राज्यों के विधानसभा चुनाव लड़े जिनमें से चार में पार्टी ने अपनी सरकार बनाई। महाराष्ट्र में पार्टी पहली बार शिवसेना से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ी और वहां भाजपा के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार बनाने में सफल रही। इसी तरह श्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व में पार्टी ने झारखंड में एक दशक से भी अधिक समय तक चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता को समाप्त करते हुए अपने दम पर सरकार बनाई। भले ही पार्टी दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों में जीत हासिल नहीं कर पाई। लेकिन भारतीय जनता पार्टी अपने वोट प्रतिशत को बढ़ाने और दिल्ली में उसे लगभग पूर्व स्तर पर कायम रखने में सफल रही।
बीते अट्ठारह महीनों में भारतीय जनता पार्टी को इन उपलब्धियों तक पहुंचाने में श्री शाह के अथक प्रयास और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दिशानिर्देश में उठाए गए कदम महत्वपूर्ण साबित हुए। इन सफलताओं तक पहुंचने में श्री शाह ने इस अवधि में रोजाना औसतन 521 किलोमीटर से भी अधिक की यात्रा की। उन्होंने इस दौरान पूरे देश में ढाई लाख किलोमीटर से अधिक की यात्रा की है। संगठन को मजबूत करने की दिशा में यात्राओं के इस क्रम में श्री शाह ने निरतंर कार्यकर्ताओंए पार्टी पदाधिकारियों और समर्थकों के साथ संपर्क कायम करने को प्राथमिकता दी।
पार्टी में सदाचार बनाए रखने के लिए उन्होंने शीर्ष स्तर से पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश देने के लिए कभी निजी हवाई जहाजों से यात्रा को प्राथमिकता नहीं दी। साथ ही पार्टी पदाधिकारियों को दिल्ली से बाहर दौरा करते वक्त गंतव्य पर रात गुजारने और कार्यकर्ताओं व समर्थकों के साथ सीधे संपर्क बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। खुद अपनी यात्राओं में उन्होंने इस अवधि में 135 बार राज्यों का दौरा किया और 174 रैलियों को संबोधित किया।संपर्कअगस्त 2014 में पार्टी अध्यक्ष पद संभालने के बाद श्री शाह ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क कायम रखने का सिलसिला भी शुरू किया। श्री शाह ने इसके लिए महीने के पहले और तीसरे सोमवार को प्रातः 9 से दोपहर 2ण्30 बजे तक का समय निश्चित किया। इस दौरान कार्यकर्ता और पदाधिकारी पार्टी अध्यक्ष से बिना समय लिए मिल सकते हैं।
इतना ही नहीं श्री शाह ने जिला स्तर पर पार्टी पदाधिकारियों से संवाद कायम करने की प्रक्रिया शुरू की। इस तरह की बैठकों का आयोजन राज्यों के उनके दौरों में किया गया। इनमें उत्तर पूर्व के राज्यों पर विशेष जोर दिया गया। राज्यों के अपने दौरों के दौरान श्री शाह ने दो घंटे का समय उन लोगों के लिए विशेष तौर पर रखा जो पार्टी अध्यक्ष से विभिन्न वजहों से दिल्ली में नहीं मिल पाते है। बीते अट्ठारह महीने में उन्होंने भाजपा मुख्यालय में साढे चार हजार से अधिक जनसंवाद बैठकों में हिस्सा लिया।
श्री शाह के कार्यकाल में पहली बार पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए व्यापक स्तर पर राष्ट्रीयए राज्यए जिला और ब्लाक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए। पार्टी संगठन के विस्तार और उसकी मजबूती में इन प्रशिक्षण शिविरों ने अहम भूमिका निभायी। पूर्व में इस तरह के आयोजनों में पार्टी कार्यकर्ताओं की संख्या सालाना करीब साढ़े तीन हजार तक सीमित रहती थी। लेकिन श्री शाह के प्रयासों से इस साल सवा सात लाख से भी अधिक कार्यकर्ता इन प्रशिक्षण शिविरों से जुड़े।
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