नई दिल्ली। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने एक प्रस्ताव पास कर सरकार से निजी क्षेत्र में पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण देने पर विचार करने को कहा है। ये प्रस्ताव केंद्र सरकार को दिया गया है। प्रस्ताव के समर्थन में जेडीयू जैसी पार्टियां भी हैं। वहीं खुद मोदी सरकार में मंत्री रामविलास पासवान ने भी निजी क्षेत्र में आरक्षण की वकालत की है।
आयोग के सदस्य शकील अंसारी ने कहा कि हमने निजी सेक्टर में आरक्षण देने की बात की है। अब ये सरकार के ऊपर है कि इसपर क्या निर्णय लेती है। प्रधानमंत्री के लिए तो ये बहुत अच्छा मौका है। वो खुद पिछड़े वर्ग से संबंध रखते हैं। सबका साथ-सबका विकास की बात भी कहते हैं। अगर पिछड़ों, अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को निजी कंपनियों में आरक्षण मिल गया तो देश की 75 फीसदी आबादी को लाभ होगा।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कोलकाता में केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पासवान ने कहा था कि एक ऐसा कानून होना चाहिए जो निजी क्षेत्र की नौकरियों में पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था कर सके। पासवान ने कहा कि निजी कंपनियां सरकार से कई लाभ उठाती हैं, उन्हें भी दलितों को आरक्षण प्रदान करना चाहिए। अब पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस बारे में बाकायदा प्रस्ताव पास कर सरकार के पास भेजा है।
वहीं बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने इस प्रस्ताव को संविधान के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि आयोग सिफारिश तो कर सकता है लेकिन फैसला सरकार को लेना है। ये विचार संविधान के खिलाफ है। निजी कंपनियां मेरिट पर काम करती हैं। आरक्षण सरकारी नौकरियों में ही दिया जाना चाहिए।
आयोग की सिफारिश पर जेडीयू नेता अली अनवर ने कहा कि टैलेंट किसी जाति की बात नहीं है। सरकार के पास अगर इच्छा शक्ति है तो निजी सेक्टर झुकेगा। सरकार को ये मांग मानना चाहिए। जेडीयू के ही नेता के सी त्यागी ने कहा कि निजी सेक्टर में पिछड़े तबके को नौकरी से अलग नहीं रखा जा सकता। संविधान निर्माताओं ने जब आरक्षण की कल्पना की थी तब ये सवाल इसलिए नहीं उठा क्योंकि तब निजी सेक्टर इतना नहीं था। आज जब सभी कुछ निजी सेक्टर में है तो आरक्षण क्यों नहीं।
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