
दरअसल, दिल्ली में कृषि भवन और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान के आवास 12 जनपथ सहित 11 जगहों से पानी के नमूने लिए गए थे, जिनकी जांच रिपोर्ट पिछले दिनों आई और रिपोर्ट में सभी नमूने बीएसआई के गुणवत्ता मानकों पर विफल पाए गए।
इसके बाद से राजधानी दिल्ली में पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट को लेकर जारी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। अगले साल के शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली में पीने के पानी का मुद्दा गर्मा गया है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की जांच में गुणवत्ता के 19 मानकों पर दिल्ली जल बोर्ड का पानी विफल पाए जाने के बाद केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच इस मुद्दे पर जंग छिड़ गई है। हालांकि, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने बुधवार को कहा था कि पानी के मसले को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार दिल्ली जल बोर्ड द्वारा मुहैया करवाए जाने वाले पानी को शुद्ध बता रही है, जबकि बीआईएस की रिपोर्ट आने के बाद पासवान ने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड का पानी पीने लायक नहीं है। पासवान ने कहा कि पानी के नमूने की जांच को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए और इसके लिए गठित की जाने वाली समिति में गैर-राजनीतिक लोग होने चाहिए।
उन्होंने कहा था कि पानी की जांच का काम विशेषज्ञों का है और इसके लिए उसके जानकारों को ही जांच समिति में सम्मिलित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि केंद्र और राज्य की एजेंसियां मिलकर पारदर्शी तरीके से दिल्ली में पानी की गुणवत्ता की जांच दोबारा करा लें।
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