BSP ने जारी की ‘जातिगत आधार’ पर उम्मीदवारों की लिस्ट


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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने विधानसभा चुनाव के लिए 100 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की है। यह लिस्ट कहीं ना कहीं सुप्रीम कोर्ट के हाल में आए फैसले की धज्जियां भी उड़ा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 2 जनवरी को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा था कि चुनाव के दौरान धर्म और जाति के नाम पर कोई भी पार्टी वोट नहीं मांग सकती।

इस फैसले के आने के एक दिन बाद ही मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अप्रत्यक्ष रूप से जाति और धर्म के आधार पर चुनाव में वोट मांगे थे। उन्होंने कहा था कि उन्होंने 403 उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार कर ली है, जिसमें  उन्होंने जाति और वर्ग के आधार पर टिकट दिए हैं। मायावती ने यह भी कहा था कि वो चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद 403 उम्मीदवारों की लिस्ट एक बार में ही जारी कर देंगी, जिसे एक बार में दिखाने में मीडिया को दिक्कत भी पेश आएगी, लेकिन उन्होंने सिर्फ 100 उम्मीदवारों के ही नामों की घोषणा की।

मायावती ने दलित मुस्लिम वोट के गठजोड पर भरोसा जताया है। 100 प्रत्याशियों की सूची में 35 मुस्लिम हैं। मायावती ये मान रही हैं कि समाजवादी पार्टी में बिखराव के कारण मुसलमान बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने के लिए उनके पक्ष में मतदान कर सकते हैं। मायावती इस बात को लेकर मुसलमानों को आगाह भी करती रही हैं। वो अपनी हर जनसभा में कहती हैं कि सपा की साइकिल टूट गई है, लिहाजा उसे वोट दे मुसलमान बीजेपी की जीत में भागेदार नहीं बनें।

 

मायावती ने इसे सोशल इंजीनियरिंग का नाम दिया है जो सुनने में बहुत अच्छा लगता है। आजकल जातिगत गठजोड को इसी नाम से पुकारा जाना लगा है। बसपा ने विधानसभा के 2007 के चुनाव में भी सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लिया था। उस चुनाव में ब्राहम्ण और दलित गठजोड था जिससे सत्ता की चाबी उनके पास आ गई थी। मायावती इस बात को अच्छी तरह जानती हैं कि सिर्फ दलित वोट से सहसारे वो यूपी पर राज्य नहीं कर सकतीं। मायावती पिछले पांच साल से यूपी की सत्ता से दूर हैं। यदि इस बार भी उन्हें बहुमत नहीं मिला तो ये फासला दस साल का हो जाएगा। वैसे भी लोकसभा में उसके एक भी सदस्य नहीं हैं।


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