
नई दिल्ली. डेढ़ साल बाद एक बार फिर देश में नकदी का संकट गहरा गया है. एटीएम से कैश गायब होने से नोटबंदी जैसे दौर की परेशानियों से लोगों को दो-चार होना पड़ रहा है. इस कैश क्रंच ने मोदी सरकार के साथ ही आरबीआई की भी नीेंद उड़ा दी है. देश के तमाम राज्यों के एटीएम नकदी को तरस रहे हैं. एटीएम सेंटर्स पर ‘नो कैश’ की लगी तख्तियां लोगों को परेशान कर रही हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में यह संकट खासा गहराया हुआ है. मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने तो इसे सियासी साजिश का हिस्सा तक करार दे दिया है. वहीं उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने नकदी संकट को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की. इस बैठक में उन्होंने इसे जल्द दूर करने की दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया है.
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार ही नहीं केंद्र सरकार की भी चिंताएं देश के तमाम राज्यों में कैश क्रंच ने बढ़ा दी हैं. आरबीआई ने इस संकट को दूर करने के लिए बैंकों के अधिकारियों के साथ बैठक भी की है. लोग नोटबंदी के दौर जैसे नकदी संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन आरबीआई नकदी की हालत उस दौर से बेहतर करार दे रही है. कैश क्रंच को लेकर वह दूसरी वजहों को जिम्मेदार मान रहा है. इस समस्या से निपटने के लिए कैश सप्लाई की दिशा में कदम उठाने की बात कहते हुए जल्द ही हालात सामान्य होने का दावा भी आरबीआई कर रहा है. आरबीआई के सूत्रों के मुताबिक असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में लोगों के जरूरत से ज्यादा कैश निकालने से यह समस्या खड़ी हुई है. सूत्रों का कहना है कि वैशाखी, बिहू, सौर नववर्ष जैसे मौकों पर लोगों को ज्यादा कैश की जरूरत थी. आरबीआई के सामने इन हालात के बीच एक और चिंता भी सता रही है. उसे आशंका है कि यदि नकदी संकट के इस दौर में कहीं नोटों की जमाखोरी शुरू होने से अफरा—तफरी मच सकती है. वित्त मंत्रालय ने आरबीआई के अलावा राज्य सरकारों के अधिकारियों आदि से इस समस्या पर बात की है.
वित्त मंत्रालय ने विभिन्न बैंकों के प्रमुखों से भी इसको लेकर चर्चा की है. वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि कैश के मामलों में ऐसा होता रहता है. किसी एक राज्य में कैश की डिमांड बढ़ने पर दूसरे राज्यों की कैश सप्लाई थोड़ी रोक दी जाती है. असम में बिहू त्योहार को देखते हुए इससे कुछ दिनों पहले से ही कैश निकासी काफी बढ़ गई थी. लिहाजा दूसरे राज्यों में आपूर्ति में कटौती की गई. असम ही नहीं कर्नाटक में भी चुनाव को लेकर वहां कैश की डिमांड बढ़ी है. फसली समय होने की वजह से भी कैश की निकासी में इजाफा होता है. देश के कई राज्यों में कैश क्रंच को देखते हुए सियासत भी तेज हो गई है.
कांंग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान पर इसको लेकर तंज कसा तो शिवराज ने भी उन पर पलटवार किया. उन्होंने इसे एक साजिश के तहत सरकार को बदनाम करने का आरोप भी बगैर किसी का नाम लिए लगाया. जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में नकदी संकट की नाराजगी लोगों ने एक एटीएम पर भी उतारी. गुस्साए लोगों ने एटीएम में तोड़फोड़ की. दूसरी ओर आरबीआई का कहना है कि नोटबंदी यानि आठ नवंबर, 2016 पहले मार्केट में 500 और 1000 के नोटों का कुल सर्कुलेशन 17.74 लाख करोड़ रुपये मूल्य का था. वहीं इस समय बड़े नोटों का सर्कुलेशन 18 लाख करोड़ रुपये मूल्य से अधिक है.
https://rashtriyadinmaan.com
