दावा: विद्युत लाइन हानियां ज्यादा वाले क्षेत्रों में किया जाना था निजीकरण


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लखनऊ. प्रदेश के पांच शहरों लखनऊ, गोरखपुर, मेरठ, वाराणसी एवं मुरादाबाद के निजीकरण पर उपभोक्ता परिषद ने बड़ा आरोप लगाते हुए सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकार के कैबिनेट द्वारा लिये गये फैसले पर उपभोक्ता परिषद ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उन जगहों को निजीकरण करने की बात कहीं गई है, जहां पर लाइन हानियां ज्यादा हो. इसके बाद भी सरकार द्वारा उन जगहों पर निजीकरण नहीं करके इन शहरों का किया जा रहा है, जहां की लाइन हानियां कई शहरों के मुकाबले बहुत कम है.
उपभोक्ता परिषद ने बताया कि विद्युत मंत्रालय भारत सरकार द्वारा दिसम्बर, २०१७ में प्रमुख सचिव ऊर्जा को जो निर्देश दिये गये थे उसमें यह स्पष्ट रूप से अंकित था उन शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में फ्रेन्चाईजी रखने की योजना बनाई जाये जहां ऐटीसी हानियां सबसे ऊपर हो. ऐसे में जिन पांच शहरों का चयन किया गया उससे ऐसा प्रतीत होता है कि निजी घरानों को बड़ा फायदा पहुंचाने के लिये यह कदम उठाया गया क्योंकि इन शहरों का थ्रू रेट रू० 5 से लेकर रू० 6.50 के बीच है. दूसरा सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस टोरेन्ट पावर आगरा का उदाहरण देकर आगे निजीकरण किया जा रहा है और यह कहा जा रहा है कि पांच वर्षों में टोरेन्ट पावर द्वारा वितरण को सुदृढ़ करने के लिये रू० 827 करोड़ का निवेश किया गया.
क्या उप्र सरकार को यह नहीं मालूम है कि जब टोरेन्ट पावर को फ्रेन्जाईजी दी गयी थी आगरा के विद्युत उपभोक्ताओं पर रू० 1147 करोड़ का मूल बकाया था. बकाया वसूल करके ही टोरेन्ट माला-माल हो जायेगा। उपभोक्ता परिषद ने मा० मुख्यमंत्री जी से मांग की है कि पांच शहरों का निजीकरण जनहित में सरकार निरस्त करे और वास्तव में ऊर्जा क्षेत्र का सुधार चाहती है तो सरकारी विभागों के बकाया वसूलने के लिये सरकार फ्रेन्चाईजी नियुक्त करे तो ज्यादा उचित होगा, और उसका लाभ सीधे जनता को मिलेगा.


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