जीडीए में सुधार के दावें केवल कागजी …


लखनऊ । जीडीए की हरित पट्टियों, सेंट्रल वर्ज और पार्कों की बदहाल दशा लचर सरकारी व्यवस्था की कहानी बयां कर रही है। हालात तो यह है कि वीसी और सचिव जीडीए को ठीक से चला तक नहीं पा रहे हैं | विभागों में भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है पर यह अधिकारी उसे दूर तक नहीं कर पा रहे हैं ।

स्थानीय पार्षद राजेंद्र त्यागी ने महानगर के बड़े सेंट्रल पार्क में खड़ी लंबी-लंबी घास और गंदगी का मुद्दा उठाया था।इसके बाद प्राधिकरण उद्यान विभाग कुम्भकर्णी नीद से जागा फिर जैसे-तैसे मजदूरों की व्यवस्था कर घास को कटवाने का काम किया। राजनगर एक्सटेंशन के लोगों ने ग्रीन बेल्ट की बदहाली को लेकर जीडीए में कई बार शिकायत की है, लेकिन समस्या का अब तक समाधान नहीं हुआ है।स्थानीय लोगो का आरोप है कि जीडीए के उद्यान विभाग की लापरवाही की वजह से हरित पट्टियां और सेंट्रल वर्ज में लगे पौधे और घास सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं।

बताते है कि बीते आठ माह से जीडीए को हरित पट्टियों और सेंट्रल वर्ज के रखरखाव के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। जीडीए वीसी ने बताया कि प्राधिकरण की ओर से दो बार निविदा प्रक्रिया आयोजित की गई, लेकिन कोई ठेकेदार मजदूरों की कमी के कारण आगे नहीं आया। अब तीसरी बार टेंडर निकाले गए हैं।

35 किलोमीटर लंबी हरित पट्टी व 140 पार्कों का रखरखाव करता है जीडीए:ग़ाज़ियाबादमे जीडीए के छोटे बड़े 140 पार्क हैं। इसके अलावा 35 किलोमीटर लंबी ग्रीन बेल्ट की देखरेख जीडीए उद्यान अनुभाग करता है। उद्यान से जुड़े कार्यों के टेंडर न होने और मजदूरों की कमी के चलते पार्कों और ग्रीन बेल्ट की खराब दशा अपनी कहानी खुद बयां कर रहे हैं।


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