
लखनऊ। वाणिज्य कर विभाग की तबादला सूची में काफी गड़बड़ी सामने आई है। इसके चलते अधिकारी हैरान-परेशान है। वाणिज्य कर विभाग की तबादला सूची ने वाणिज्य कर अधिकारियों को दोराहे पर खड़ा कर दिया है। जहां एक तरफ ज्वाइंट कमिश्नरों की सूची जारी हुई तो कुछ ऐसी जगह पर तबादले हो गए जहां पद ही खाली नहीं तो दूसरी तरफ कई जगह पद खाली होने के बावजूद वहां कोई अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया। जबकि डिप्टी और असिस्टेंट कमिश्नर की तबादला सूची जारी होने के पहले ही विवादों की भेंट चढ़ गई।
काफी जद्दोजहद के बाद आई 41 ज्वाइंट कमिश्नरों की तबादला में एक ही पद पर दो-दो अधिकारियों की तैनाती हो जाने से ऊहापोह की स्थिति पैदा हो गई है। सूत्रों का कहना है कि तबादला सूची बनाने में न जानकारों की कोई सलाह ली गई और न ही इसके लिए कोई कमेटी ही गठित हुई। जारी सूची में कानपुर के ज्वाइंट कमिश्नर संगम लाल का तबादला नहीं किया गया जबकि उनकी जगह पर फैजाबाद के ज्वाइंट कमिश्नर का स्थानांतरण कर दिया गया।
वहीं लखनऊ एसआईबी रेंज ‘बी का पद पिछले एक वर्ष से खाली है उस पर इस तबादला सूची से भी नहीं भरा जा सका। जबकि इस पर जिनकी तैनाती पिछले वर्ष की गई थी उन्होंने अभी तक कार्यभार ही ग्रहण नहीं किया। वहीं गाजियाबाद में ज्वाइंट कमिश्नर एसआईबी के दो पद व मथुरा एसआईबी के एक पद पर किसी अधिकारी की तैनाती ही नहीं हुई।
एसआईबी व कारपोरेट सेल के ज्वाइंट कमिश्नर जैसे पदों पर दो-दो अधिकारियों की नियुक्ति से घमासान मचना तय है। इसी तरह कानपुर की सचल दल इकाई प्रथम में सीटीओ संवर्ग का एक पद है। लेकिन तीन अधिकारियों की तैनाती की गई है। गाजियाबाद के खण्ड-5 में एक सीटीओ का पद है यहां भी एक और तैनाती कर दी गई। जीएसटी में पंजीयन प्रकोष्ठ समाप्त हो जाने के बाद भी करीब 23 अधिकारियों की तैनाती कर दी गई। जब यहां काम ही नहीं है तो तैनाती क्यों दी गई यह सवालों के घेरे में है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार असिस्टेंट और डिप्टी कमिश्नरों की सूची 31 मई तक जारी हो जानी थी। लेकिन आखिरी वक्त पर सही सूची न बनने के कारण जारी नहीं हो सकी। विभागीय लोगों का कहना है कि इस सूची में भी एक ही पदों पर दो-दो अधिकारियों की नियुक्तियां और खाली जगहों को न भरने जैसी गलतियां की गईं। हालांकि कमिश्नर वाणिज्य कर मुख्यालय से सूची भेजी तो गई थी लेकिन शासन ने इस सूची पर सवाल खड़े कर दिए।
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