गाजियाबाद में औद्योगिक पार्क पर रिहायशी बहुमंजिला फ्लैट्स का निर्माण, जीडीए वीसी, सचिव, टाऊन प्लानर,सीडा की एजीएम सहित 14, अधिकारियों पर धोखाधड़ी का मामला, कोर्ट में शिकायत


प्रभारी निरिक्षक थाना, साहिबाबाद को  रिपोर्ट पेश करने के आदेश , मामले में सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तारीख नियत
  lucknow |   गाजियाबाद की सामाजिक कार्यकर्ता पूजा रंजन ने सोमवार को जीडीए उपाध्यक्ष, नगर आयुक्त व अन्य अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों समेत 14 लोगों के खिलाफ अवैध रूप से औद्योगिक पार्क पर कब्जा करते हुए रिहायशी बहुमंजिला फ्लैट्स निर्माण का आरोप लगाया है। धोखाधड़ी जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने के लिए विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण, मेरठ पीएन पांडेय की अदालत में सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत शिकायती पत्र दिया है। अदालत ने इस पत्र को संज्ञान में लेते हुए प्रभारी निरिक्षक थाना, साहिबाबाद को इस पर अपनी रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। मामले में सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तारीख नियत की है ।
सरकारी वकील सिराजुद्दीन अलवी ने बताया कि अखिल भारतीय उपभोक्ता परिषद गाजियाबाद की कार्यकारणी सदस्य पूजा रंजन ने शिकायती पत्र के माध्यम से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण(जीडीए) की उपाध्यक्ष कंचन वर्मा, उत्तर प्रदेश राज्य औघोगिक विकास निगम लिमिटेड की एजीएम स्मिता सिंह, नगर नियोजक गाजियाबाद आशीष शिवपुरी, सचिव जीडीए संतोष कुमार राय, जीडीए बोर्ड सदस्य सचिन डागर, आसिफ खान, हिमांशु मित्तल, नगर आयुक्त गाजियाबाद दिनेश चंद्र, जीडीए अभियंता राजेश शर्मा व सीपीशर्मा, सीओ गाजियाबाद डा. राकेश कुमार, थानाध्यक्ष साहिबाबाद अनिल शाही, चौकी इंचार्ज जितेंद्र कुमार, दुर्गा इंटरप्राईज़ेज गाजियाबाद के निदेशक अंकुर अग्रवाल सहित औद्योगिक विकास विभाग के सचिव, प्रमुख सचिव व अनुसचिव को आरोपी बनाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। आरोप लगाया है कि इन सब लोगों ने मिलीभगत से अवैध रूप से औद्योगिक पार्क को विकसित करने वाली जमीन पर अवैध रूप से तकरीबन 50 हजार वर्ग मीटर भूमि पर रिहायशी फ्लैट का निर्माण कार्य धड़ल्ले से कराया जा रहा है।
सभी अधिकारियों को शिकायतकर्ता द्वारा शिकायती पत्र लिखकर सूचित किया जा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
आरोप में कहा गया है कि साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास मेन जीटी रोड पर प्रदेश सरकार ने 64 एकड़ भूमि मैसर्स मालको लिमिटेड को आवंटित की थी, एग्रीमेंट की शर्त के अनुसार उक्त भूमि का उपयोग केवल औद्योगिक प्रयोजन के लिए किया जाएगा। किसी भी प्रकार से भूमि का भू-उपयोग नहीं बदला जाएगा, जिसके बाद उक्त जमीन मैसर्स दुर्गा इंटरप्राइज़ेज़ को बेच दी गई। उक्त कंपनी ने औद्योगिक पार्क का मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए जीडीए में आवेदन किया।
आरोप है कि जीडीए के अधिकारियों ने 19 मार्च 2019 को 25 एकड़ से कम भूमि का मानचित्र पास कर दिया। इसके बाद दोबारा एक और मानचित्र पास कर दिया जबकि 50 हजार वर्ग मीटर जमीन को मानचित्र अतिक्रमित क्षेत्र दर्शा दिया गया। रिहायशी फ्लैट का निर्माण किया जा रहा है। इसकी जानकारी आला अधिकारियों को दी गई। जीडीए की ओर से इस अवैध निर्माण के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई, लेकिन उस पर अब तक भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विशेष न्यायाधीश से मुकदमे की गुहार लगाई है।

Scroll To Top
Translate »