दिल्‍ली में 2000 सीसी से अधिक की डीजल गाड़ियों के रजिस्‍ट्रेशन पर लगी रोक


 

New Delhi: FILE- A view of traffic jam at Ring Road near ISBT in New Delhi recently. In a move to curb pollution, the Delhi government on Friday proposed a 'odd/even' number formula for cars. The move is planned to be rolled out from January 1, 2016. According to the proposal, cars with odd number plate and even number plate will ply on roads on alternate days. PTI Photo   (PTI12_4_2015_000328B)

New Delhi: FILE- A view of traffic jam at Ring Road near ISBT in New Delhi recently. In a move to curb pollution, the Delhi government on Friday proposed a ‘odd/even’ number formula for cars. The move is planned to be rolled out from January 1, 2016. According to the proposal, cars with odd number plate and even number plate will ply on roads on alternate days. PTI Photo (PTI12_4_2015_000328B)

नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को डीजल गाड़ियों पर एक बड़ा फैसला दिया है. जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने आज तत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में 2000 सीसी से अधिक की डीजल गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी है. 31 मार्च 2016 तक दिल्ली व एनसीआर में डीजल गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई गई है. साथ ही, 2005 से पहले के रजिस्ट्रेशन वाले ट्रकों की दिल्ली में एंट्री पर भी बैन लगा दिया गया है. इसके अलावा, जिन ट्रकों में अब दिल्ली का सामान नहीं होगा, उनकी एंट्री पर भी दिल्ली में रोक लगा दी गई है. साथ ही, दिल्ली में आने वाले ट्रकों पर लगने वाला ग्रीन टैक्स दोगुना हो गया.

प्रदूषण के बढ़ते स्तर से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों संकेत दिया था कि वह अगले तीन चार महीने के लिये 2000 सीसी से अधिक क्षमता वाले इंजनों की डीजल एसयूवी, कारों और वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगा सकता है. शीर्ष अदालत ने राजधानी में प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर काबू पाने के इरादे से 12 अक्तूबर को एक नवंबर से दिल्ली में प्रवेश करने वाले हल्के वाहनों पर सात सौ रूपए और तीन एक्सेल वाहनों पर 1300 रूपए पर्यावरण हर्जाना शुल्क लगाने का आदेश दिया था. यह शुल्क इन वाहनों से वसूल किये जाने वाले टोल टैक्स के अतिरिक्त है.

न्यायालय मंगलवार को समय के अभाव में अंतरिम निर्देश नहीं दे सका था, इसलिए आज इस संबंध में अंतरिम निर्देश दिया गया. मंगलवार को इस मामले में तीन घंटे तक चली सुनवाई के दौरान पीठ ने केन्द्र और दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों से कहा कि वे वायु प्रदूषण की समस्या से निबटने के लिये अल्पकालीन और दीर्घकालीन विस्तृत योजना पेश करें. पीठ ने कहा था कि आप लोग दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाने का श्रेय क्यों नहीं लेते? आप बता सकते हैं कि कौन से कदम उठाने चाहिए और आप न्यायालय से ऐसा करने के लिये क्यों कह रहे हैं? सुनवाई के दौरान साल्वे ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी डीजल वाहनों पर है क्योंकि दिल्ली में करीब 30 फीसदी डीजल वाहन चलते हैं.

न्याय मित्र के इस कथन का विरोध करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि वाहनों की कुल संख्या में डीजल गाड़ियों का हिस्सा बहुत थोड़ा है और उन्हें निशाना नहीं बनाना चाहिए. दवे ने कहा कि डीजल वाहनों पर किसी भी प्रकार के नियंत्रण पर प्रतिकूल असर पड़ेगा क्योंक इसमें हजारों कार्मिक और बड़ा निवेश शामिल है. उन्होंने कहा कि डीजल वाहनों पर अंकुश लगाना ‘व्यावहारिक समाधान’ नहीं है. हालांकि पीठ ने इस कथन से असहमति व्यक्त की और कहा कि यह बहुत बड़ी संख्या है और वे शहर को प्रदूषित कर रहे हैं.

गौर हो कि हाल में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने निर्देश दिया था कि दिल्ली में तत्काल प्रभाव से डीजल से चलने वाले वाहनों का पंजीकरण नहीं होगा. अधिकरण ने केन्द्र और राज्य सरकार के विभागों से कहा था कि वे डीजल गाड़ियां नहीं खरीदें. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने भी प्रदूषण को लेकर छिड़ी बहस में दखल दिया और राजधानी में आवश्यक वस्तुओं को लेकर आने वाले वाहनों के अलावा डीजल से चलने वाली ट्रकों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के सुझाव पर गौर करने के लिये तैयार हो गया था.

 


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