जीडीए के सिटी फॉरेस्ट में गंदगी, बदबू जन सुविधाओं का बुरा हाल,जनता में रोष


जीडीए अधिकारियों की लापरवाही, कौन है जिम्मेदार ,दोषियों पर हो कार्रवाई

लखनऊ। जीडीए का राजनगर एक्सटेंशन स्थित बड़े पिकनिक स्पाट सिटी फारेस्ट का आज कल बुरा हाल है । जनसुविधाओं के अभाव में गंदगी का ढेर जगह जगह नजर आ रहा है । पाक में झूलों और पूछताछ काउंटर की भी दशा खराब है । इससे यहां घूमने आये लोगों में भरी नाराजगी देखी गई ।। 150 एकड़ में फैले सिटी फॉरेस्ट में जन सुविधाओं में बने शौचालय में बदबू के साथ गंदगी का ढेर नजर आया। परिवार के साथ पिकनिक मनाने निकले लोग और युवा सुलभ सेवाओं के लिए भटकते दिखाई दिए। इसे लेकर युवतियों ने नाराजगी भी जताई। वहीं, सिटी फॉरेस्ट की अंदर की पॉकेट में डस्टबिन गिरी हुई और उनमें गंदगी भरी नजर आई। कई दिनों पहले हुई बारिश के बावजूद कुछ जगह पैदल पथ पर जलभराव दिखाई दिया।

सिटी फॉरेस्ट में बच्चों और युवाओं के लिए बोटिंग के पास वाली पॉकेट में एडवेंचर पार्क विकसित किया गया है। लेकिन यहां लगाए गए झूले और बनाया गया पूछताछ काउंटर अब खुद मरम्मत की राह देख रहा है। एडवेंचर पार्क में टायरों और रस्सी की मदद से चढ़ने की एक एक्टिविटी तैयार की गई थी। लेकिन अब चढ़ने के लिए लगाई गई रस्सी बीच में से गायब हो चुकी है। ऐसे में रस्सी की ओर से चढ़ने का प्रयास करते कई बच्चे जोखिम भरा प्रयास करते नजर आए। उसी के 20 मीटर दूरी पर बनी एक ओर एक्टिविटी में लोहे की बनी फाउंडेशन एक ओर झुक गई है। इसके बावजूद लोग उस पर चढ़कर सेल्फी लेते दिखाई दिए। वहीं एडवेंचर पार्क में गेट के बराबर पूछताछ के लिए बनाया गया काउंटर पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। जर्जर पड़े काउंटर पर कोई कर्मचारी नजर नहीं आया।


जीडीए की ओर से सिटी फॉरेस्ट में प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति 10 रुपये टिकट निर्धारित की गई है। सोमवार से शुक्रवार तक 300 से 350 के करीब लोग पार्क में घूमने आते हैं। शनिवार और रविवार को यह संख्या 500 के ऊपर पहुंच जाती है। रविवार को पार्क में उमड़ी भीड़ के कारण कार से पहुंचे लोगों को अपने वाहनों को पार्क करने में परेशानी झेलनी पड़ी।

सिटी फॉरेस्ट के अंदर सीमित करीब 50 वाहनों को पार्क करने की व्यवस्था है। ऐसे में अधिकांश लोगों को सड़क से सटे मुख्य द्वार के पास बनी पार्किंग में वाहन लगाने पड़े। बीते साल जीडीए सचिव बृजेश कुमार ने सिटी फॉरेस्ट का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे। आदेश के बावजूद अभी कई चीजों पर काम होना बाकी है।



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