
करोड़ों रुपये के कथित उड्डयन घोटाले के अलावा अंतरराष्ट्रीय एअरलाइनों के लिए हवाई स्लॉट निर्धारित करने में अनियमितताओं के चलते एअर इंडिया को हुए नुकसान की जांच चल रही है। संर्क करने पर चिदंबरम ने पूछताछ के बारे में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट के तहत चिदंबरम का बयान दर्ज किया गया है। ईडी ने पहले भी अगस्त 2019 में चिदंबरम से पूछताछ की कोशिश की थी लेकिन तब वह सीबीआई की हिरासत में थे। चिदंबरम पिछले साल 4 दिसंबर को तिहाड़ जेल से 106 दिनों के बाद रिहा हुए थे।
क्या है मामला?
तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम मंत्रियों के उस समूह के प्रमुख थे जिसने वर्ष 2009 में विमानों की खरीद का फैसला लिया था। मूल प्रस्ताव एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के लिए 28 विमान खरीदने का था लेकिन सरकार ने एयरबस 68 विमान एंयर इंडिया के लिए और 43 विमान इंडियन एयरलाइंस के लिए खरीदने का फैसला लिया था।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी नोटिंग में लिखा था कि जब एयरलाइंस गंभीर संकट में थी तब यह फैसला बर्बादी की ओर बढ़ाने वाला है। सीबीआई इस मामले में विमान खरीद के अलावा तीन अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है- बिना किसी विमर्श के एयर इंडिया द्वारा विमानों को लीज पर देना, जिन रूटों पर प्रॉफिट था वे रूट्स निजी एयरलाइंस को दिए जाने और एयर इंडिया व इंडियन एयरलाइंस का विलय।
पिछले साल सितंबर में सीबीआई ने लॉबीइस्ट दीपक तलवार के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। सीबीआई का दावा है कि प्रॉफिट वाले रूट्स सरकारी एयरलाइंस से निजी एयरलाइंस को दिलवाने के लिए हुई बातचीत में दीपक तलवार ने बिचौलिये की भूमिका निभाई थी।
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