मंदिर मुद्दे को सुलझाने की कोशिशें तेज, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से मिले शिया नेता वसीम रिजवी


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lucknow |  उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसील रिजवी ने आज आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से मुलाकात की। ये मुलाकात करीब आधे घंटे तक चली। राम मंदिर मुद्दे को सुलझाने के लिए श्री श्री रविशंकर ने मध्यस्थता की पेशकश की है। इसी कड़ी में शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने उनसे मुलाकात की। इससे पहले शिया वक्फ बोर्ड ने अयोध्या में सरयू तट पर लगने वाली भगवान की सौ मीटर ऊंची प्रतिमा के लिए चांदी के 10तीर देने की घोषणा की थी। श्री श्री से मुलाकात के बाद रिजवी ने उम्मीद जताई की राम मंदिर का मसला जल्द सुलझ जाएगा। उन्होंने ये भी उम्मीद जताई कि अगले  साल यानी 2018 में रामजन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा।

रिजवी ने कहा कि जहां आज रामलला विराजमान हैं वहां हमेशा से राम मंदिर रहा है। अयोध्या और फैजाबाद में बहुत मस्जिदें हैं जो वहां रहने वाले मुसलमानों के लिए काफी हैं। रिजवी ने कहा कि जो लोग देश में शांति चाहते हैं वह इस कदम की तारीफ कर रहे हैं, जो देश में हिंसा चाहते हैं वह इसके खिलाफ हैं। रिजवी ने कहा कि राम के नाम पर देश में लड़ाई नहीं होनी चाहिए। कुछ मौलवियों को छोड़कर सभी लोग कोई सॉल्यूशन चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो शिया वक्फ की तरफ से बोल रहे हैं, शिया वक्फ ही यह तय करता है कि मस्जिद कहां बनेगी. हमने अयोध्या में सभी पक्षों से बात की है। शिया वक्फ बोर्ड शुरू से ही इस मसले को बातचीत के जरिए सुलझाने का समर्थक रहा है। इस मामले में पार्टी बनाए जाने के लिए शिया वक्फ बोर्ड ने कोर्ट में अर्जी भी लगाई है। अयोध्या मसले में सुन्नी वक्फ बोर्ड से पहले शिया वक्फ बोर्ड ही पार्टी था, लेकिन आजादी के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड को ये मामला सौंप दिया गया। सुन्नी वक्फ बोर्ड किसी भी कीमत पर अयोध्या में रामजन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण नहीं होने देना चाहता है।

बता दें कि मध्यस्थता की पहल की शुरुआत करते हुए श्रीश्री रविशंकर ने कहा था, ‘एक ऐसे मंच की जरूरत है, जहां दोनों समुदाय के लोग अपने बीच का भाईचारा दिखा सकें. ऐसी ही कोशिश 2003-04 में भी की थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं, लोग शांति चाहते हैं.’ इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि यह प्रयास वह खुद कर रहे हैं और यह पूरी तरह अराजनीतिक हैं.हालांकि, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे बीजेपी के पूर्व सांसद राम विलास वेदांती ने श्री श्री की मध्यस्थता को स्वीकार करने से इनकार किया था. उन्होंने कहा था कि ‘श्री श्री रविशंकर की मध्यस्थता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी. राम जन्मभूमि आंदोलन राम जन्मभूमि न्यास और विश्व हिंदू परिषद ने लड़ा है इसलिए वार्ता का अवसर भी इन दोनों संगठनों को मिलना चाहिए.’गौरतलब है कि जब से राज्य में योगी सरकार आई है, राममंदिर का मुद्दा एक बार फिर गर्म हो गया है. सीएम योगी ने भी इस बार छोटी दिवाली अयोध्या में मनाई, इस दौरान भव्य आयोजन किया गया.

योगी सरकार अयोध्या में 100 मीटर ऊंची भगवान राम की मूर्ति भी लगवा रही है। वैसे तो राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। कोर्ट ने ही सभी पक्षों से मिलकर आपसी बातचीत के जरिए मसले को सुलझाने का सुझाव दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सभी पक्ष कोर्ट से बाहर इस मसले के समाधान को कोशिश करें।  इसके बाद से ही इस विवाद को कोर्ट के बाहर बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।


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