
उन्होंने कहा कि बायोपिक मामले के आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि, ”पहले से प्रमाणित किसी भी प्रचार सामग्री से जुड़े पोस्टर या प्रचार का कोई भी माध्यम, जो किसी उम्मीदवार के बारे में चुनावी आयामों का प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चित्रण करता हो, चुनाव आचार संहिता के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।”
उल्लेखीय है कि चुनाव आयोग ने निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान किसी राजनीतिक दल या राजनेता को चुनावी लाभ पहुंचाने वाली फिल्म की रिलीज की अनुमति देने से इंकार करते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जीवन पर आधारित बायोपिक सहित दो अन्य फिल्मों के प्रदर्शन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। आयोग ने बुधवार को अपने आदेश में कहा, ”चुनाव के दौरान ऐसी किसी फिल्म को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सिनेमाघरों में प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जा सकती है जिससे किसी राजनीतिक दल या राजनेता को चुनावी लाभ मिलने की संभावना हो।” उल्लेखनीय है कि बायोपिक ‘पीएम नरेन्द्र मोदी को 11 अप्रैल को रिलीज किया जाना था। सात चरण में होने वाले 17वीं लोकसभा के चुनाव के लिये पहले चरण का मतदान भी 11 अप्रैल को ही है।
माकपा सहित अन्य विपक्षी दलों की शिकायत पर आयोग ने इसके प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। शिकायत में कहा गया है कि मोदी पर आधारित बायोपिक को चुनाव के दौरान प्रदर्शित करने का मकसद भाजपा को चुनावी फायदा पहुंचाना है। इसलिये चुनाव के दौरान इसके प्रदर्शन की अनुमति देने से चुनाव आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन होगा।
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